कामां की 26 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों के भुगतान पर उठे सवाल
अंगूठे लगे न हस्ताक्षर, मजदूरों को ₹3.21 करोड़ का भुगतान हो गया; सरपंच-वीडीओ के खातों में पहुंचा पैसा

ब्यूरो चीफ राकिब खांन
डीग।कामां: पंचायत समिति कामां की 26 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों और श्रमिक भुगतान के नाम पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों और ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इन ग्राम पंचायतों में करीब 3 करोड़ 21 लाख रुपये के भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कई भुगतान ऐसे बताए गए हैं, जिनमें मजदूरों के मस्टररोल पर न तो अंगूठे के निशान मिले और न ही हस्ताक्षर, इसके बावजूद उनके नाम से भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि भुगतान की राशि मजदूरों के खातों में जाने के बजाय सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) और अन्य संबंधित खातों में पहुंच गई।
मस्टररोल में मजदूरों के हस्ताक्षर नहीं मिले
जांच में सामने आया कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए तैयार किए गए मस्टररोल में श्रमिकों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं मिले। वहीं, भुगतान पंजिका में भी कई मामलों में भुगतान का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं पाया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में पंचायत राज नियमों के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत द्वारा मजदूरों को नकद भुगतान किए जाने की स्थिति में भी भुगतान पंजिका का संधारण नहीं किया गया।
ऑडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़ी का उल्लेख
सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा की शिकायत के बाद कराए गए ऑडिट में वर्ष 2023-24 में करीब 47.49 लाख रुपये और वर्ष 2024-25 में करीब 2.73 करोड़ रुपये सहित कुल 3.21 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पंचायतों में श्रमिक भुगतान, बैंक खातों के संचालन और मस्टररोल के संधारण में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतकर्ता ने मामले में संबंधित रिकॉर्ड को तत्काल सीज करने, एफआईआर दर्ज कराने तथा एसीबी या एएसआईटी से जांच कराने की मांग की है।
कमेटी गठित, जांच रिपोर्ट का इंतजार
मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ने डीग कलेक्टर से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद जिला कलेक्टर की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रिकॉर्ड के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन मजदूरों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान दर्शाया गया, क्या वास्तव में उन्हें राशि मिली या फिर सरकारी धन दूसरे खातों में पहुंचा? जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।




