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जंतर-मंतर की गूँज: मीडिया के छलावे, विपक्ष की जड़ता और सड़कों पर उभरता युवा आक्रोश
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की सोई हुई चेतना…
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ई-20, माइलेज और भरोसे का संकट
भारत को अगर सचमुच ऊर्जा-संक्रमण के रास्ते पर आगे बढ़ना है, तो यह काम नारेबाज़ी से नहीं, पारदर्शिता, तकनीकी ईमानदारी…
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रामपुर में बुलडोज़र, राजनीति में संदेश
उत्तर प्रदेश के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की तैयारी ने एक बार फिर…
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रील्स का छलावा बनाम रियल स्किल्स का साम्राज्य: युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग
“जिस कैमरे के लेंस में तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ढूँढ रहे हो, उसे केवल अपनी कला का विज्ञापन बनाओ; अपनी…
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महंगाई का डबल अटैक और सरकार की जवाबदेही
देश में महंगाई अब कोई क्षणिक समस्या नहीं रह गई है, वह एक स्थायी जन-पीड़ा में बदलती जा रही है।…
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इथेनॉल क्रांति का वैज्ञानिक सच, आर्थिक विसंगतियां और हितों के टकराव का यक्ष प्रश्न
परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन की खोज केवल तकनीकी प्रगति का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक स्वावलंबन,…
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तंत्र की संवेदनशून्यता और मीडिया का ‘सन्नाटा’—क्या लोकशाही सिर्फ एक चुनावी रस्म रह गई है?
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आंदोलनों की एक गौरवशाली परंपरा रही है। आंदोलन केवल सड़कों का हुजूम नहीं होते, वे…
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होर्मुज़ की धमक और भारत की कूटनीतिक परीक्षा
पश्चिम एशिया एक बार फिर उस चौराहे पर खड़ा है जहाँ हर सैन्य निर्णय, हर बयान और हर पलटवार केवल…
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जवाबदेही से पलायन और संवाद की गिरती संस्कृति
“भारतीय लोकतंत्र की नींव” शासकों की जनता के प्रति अटूट जवाबदेही और विमर्श की शालीनता पर टिकी है। परंतु, हाल…
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जेल से चलती दुनिया: जब भारत का अपराध-तंत्र विदेश नीति, संविधान और राज्य की विश्वसनीयता का प्रश्न बन जाए
यह केवल एक गैंगस्टर की कहानी नहीं है। यह भारतीय राज्य की परीक्षा है। अमेरिकी न्याय विभाग ने 7 जुलाई…
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