साथियों, आज मैं देश के चौथे स्तंभ, मीडिया से एक सवाल पूछना चाहता हूँ- बदन सिंह कुशवाह
जब किसी मंदिर में कोई चमत्कार होने की बात आती है, जब किसी सनसनीखेज घटना को दिखाना होता है, तब मीडिया दिन-रात कवरेज करता है। लेकिन जब करोड़ों ओबीसी समाज के अधिकारों, जनगणना, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार या जनहित के मुद्दों की बात आती है, तब यह आवाज़ आखिर क्यों दबा दी जाती है?
क्या ओबीसी समाज की पीड़ा खबर नहीं है? क्या हमारे आंदोलन, हमारे ज्ञापन और हमारे संवैधानिक अधिकारों की मांग जनता तक पहुँचाने योग्य नहीं हैं?
हमने रूपवास में कई बार शांतिपूर्ण आंदोलन किए, जनहित के मुद्दे उठाए और अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं की जानकारी भी मीडिया को दी। लेकिन अधिकांश मामलों में हमारी बात को वह स्थान नहीं मिला जिसकी लोकतंत्र में अपेक्षा की जाती है। यह सवाल केवल ओबीसी समाज का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में समान प्रतिनिधित्व का है।
हम मीडिया से टकराव नहीं चाहते, बल्कि निष्पक्षता चाहते हैं। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब हर वर्ग की आवाज़ को समान महत्व मिलेगा। यदि मीडिया केवल चुनिंदा मुद्दों को ही प्रमुखता देगा और बाकी समाज की आवाज़ को अनसुना करेगा, तो लोगों का भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
हम किसी से विशेष कृपा नहीं मांगते। हम केवल संविधान द्वारा दिए गए समान अधिकार, समान सम्मान और अपनी बात रखने का समान अवसर चाहते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करें, ताकि देश का हर नागरिक, चाहे वह किसी भी वर्ग या समाज से हो, उसकी बात बराबरी के साथ सुनी जाए।
जय संविधान।जय भारत।




