ब्लॉग
Your blog category
-
सत्ता की परीक्षा, छात्रों की अग्निपरीक्षा
भारत का लोकतंत्र केवल मतदान से नहीं, उत्तरदायित्व से चलता है। जब सड़क पर खड़ा छात्र यह पूछे कि उसकी…
Read More » -
पत्रकारिता की सबसे बड़ी परीक्षा: सत्ता के साथ खड़े होना या सच के साथ?
लोकतंत्र में पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक—ये चारों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जवाबदेही की श्रृंखला के हिस्से हैं। लेकिन…
Read More » -
क्या अब छात्रों से भी डरती है सत्ता?
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का आह्वान केवल एक प्रदर्शन नहीं था; वह उस पीढ़ी की दस्तक…
Read More » -
कलम से बैरिकेड तक: आज़ादी के बाद भारतीय मीडिया, परीक्षा-घोटालों और छात्र-आंदोलनों का वृहद विश्लेषण
स्वतंत्र भारत में परीक्षा-लीक और रद्दीकरणों का कोई एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय “मास्टर-लिस्ट” सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यहाँ…
Read More » -
लाठी किसके हाथ में थी? लोकतंत्र में सबसे खतरनाक सवाल यही है
लोकतंत्र में पुलिस की लाठी भी कानून से चलती है। उस पर संविधान का नियंत्रण होता है। उसकी जवाबदेही न्यायपालिका…
Read More » -
जंतर-मंतर की गूँज: मीडिया के छलावे, विपक्ष की जड़ता और सड़कों पर उभरता युवा आक्रोश
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की सोई हुई चेतना…
Read More » -
ई-20, माइलेज और भरोसे का संकट
भारत को अगर सचमुच ऊर्जा-संक्रमण के रास्ते पर आगे बढ़ना है, तो यह काम नारेबाज़ी से नहीं, पारदर्शिता, तकनीकी ईमानदारी…
Read More » -
रामपुर में बुलडोज़र, राजनीति में संदेश
उत्तर प्रदेश के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की तैयारी ने एक बार फिर…
Read More » -
रील्स का छलावा बनाम रियल स्किल्स का साम्राज्य: युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मार्ग
“जिस कैमरे के लेंस में तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ढूँढ रहे हो, उसे केवल अपनी कला का विज्ञापन बनाओ; अपनी…
Read More » -
महंगाई का डबल अटैक और सरकार की जवाबदेही
देश में महंगाई अब कोई क्षणिक समस्या नहीं रह गई है, वह एक स्थायी जन-पीड़ा में बदलती जा रही है।…
Read More »