ओबीसी की जनगणना के अनुरूप मिले राजनीतिक भागीदारी, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन – ओबीसी महासभा
मांग को लेकर मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रूपबास को सौंपा गया

राजस्थान प्रदेश में चल रही ओबीसी जनगणना के संदर्भ में ओबीसी महासभा ने मांग की है कि पंचायती राज एवं निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उसकी वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक आरक्षण एवं भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
महासभा का कहना है कि राजस्थान में गुर्जर, कलाल, कुनबी, पटेल, पाटीदार, धाकड़, जाट, उर्मी, छीपी, कुम्हार, कुंभकार, प्रजापति, नाई, सेन, राय, भाट, नागर, सैनी, माली, शाक्य, मौर्य, कुशवाहा सहित लगभग 91 ओबीसी जातियां निवास करती हैं, जिनकी जनसंख्या प्रदेश में लगभग 50–60 प्रतिशत बताई जाती है।
महासभा के अनुसार, यदि आगामी पंचायती राज एवं निकाय चुनावों में ओबीसी को उसकी जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण नहीं दिया जाता और केवल सीमित प्रतिशत तक ही भागीदारी दी जाती है, तो यह सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत होगा। सूत्रों के अनुसार, कई क्षेत्रों में ऐसी स्थिति बन सकती है कि जहां अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) का आरक्षण अधिक होगा, वहां ओबीसी का आरक्षण काफी कम रह जाएगा। उदाहरणस्वरूप, यदि किसी पंचायत समिति में एससी/एसटी का आरक्षण 35 प्रतिशत है तो ओबीसी को लगभग 15 प्रतिशत तथा यदि एससी/एसटी का आरक्षण 40 प्रतिशत है तो ओबीसी को लगभग 10 प्रतिशत ही भागीदारी मिल सकती है। यह आंकड़े सार्वजनिक रूप से अंतिम रूप से घोषित नहीं हुए हैं; वास्तविक आरक्षण सरकार की अधिसूचना के अनुसार निर्धारित होगा।
ओबीसी महासभा का कहना है कि यदि ओबीसी समाज को उसकी वास्तविक जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो पूरे राजस्थान में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन किया जाएगा।



