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खैरथल की ग्राम पंचायतों में गूंजा वंदे गंगा जल संरक्षण का संदेश

'जल संचय-जन भागीदारी' से संवरेंगे जिले के जलाशय

अलवर।खैरथल – तिजारा: राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिलेभर में जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई जा रही है। शुक्रवार को ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल स्रोतों के पुनरुद्धार, साफ-सफाई और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया। जिला प्रशासन के निर्देशन में आयोजित इस महाअभियान में जनप्रतिनिधियों से लेकर आम ग्रामीणों तक ने उत्साहपूर्वक श्रमदान किया।

तालाब-जोहड़ों का कायाकल्प, सार्वजनिक स्थलों पर चला स्वच्छता अभियान

अभियान के दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वय से गांवों की सूरत बदलने का प्रयास किया गया। जिले के प्राचीन तालाबों, जोहड़ों और पारंपरिक जलाशयों की साफ-सफाई के साथ उनकी मरम्मत के कार्य युद्ध स्तर पर किए गए। इसके अलावा गांवों के मुख्य मार्गों, चौराहों, मंदिरों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर कचरा मुक्त वातावरण तैयार किया गया।

राजीविका की महिलाओं ने संभाली कमान, सोखता गड्ढों की हुई सफाई

जल संकट से निपटने के लिए गांवों में बने सोखता गड्ढों (सोक्ता गड्ढों) की सफाई की गई ताकि भूजल स्तर को सुधारा जा सके। इस महाअभियान में ‘राजीविका’ के ग्राम संगठनों और सीएलएफ कार्यालयों के माध्यम से महिला शक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई। महिलाओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) और पानी की बर्बादी रोकने के प्रति जागरूक किया।

‘जल संचय जन भागीदारी-2.0’ पोर्टल पर होगी लाइव मॉनिटरिंग

अभियान को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत इन्द्राज से शेष रहे सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर “जल संचय जन भागीदारी-2.0” पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इससे जिले में चल रहे जल संरक्षण कार्यों की उच्च स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी।

अपील और उद्देश्य:

जिला प्रशासन ने आमजन से आह्वान किया है कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाकर पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को पानी के संकट से बचाया जा सके।

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