आज से बड़े बदलाव: राजस्व न्यायालयों में 7 लाख से अधिक लंबित मामले, रोजाना 4 घंटे सुनवाई अनिवार्य

जयपुर, राजस्थान। राज्य के 1700 राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में लगभग 7 लाख से अधिक मामले पेंडिंग हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया की गति को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक एसडीओ कोर्टों में मामलों का बोझ है। इसी को ध्यान में रखते हुए, आज से राजस्व न्यायालयों में हर रोज़ कम से कम 4 घंटे सुनवाई अनिवार्य कर दी गई है।
राज्य न्यायिक प्रणाली में इस नए नियम का उद्देश्य लंबित मामलों के निपटान में तेजी लाना है ताकि आम नागरिकों को न्याय दिलाने में देरी न हो। यह फैसला राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच सहयोग से लिया गया है। कोर्टों में सुनवाई के लिए निर्धारित 4 घंटे के सत्र से केसों की सुनवाई और फैसलों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राजस्व न्यायालयों में एसडीओ कोर्ट का बोझ विशेष रूप से अधिक है क्योंकि यहां भूमि विवाद, संपत्ति अधिकारों से संबंधित मामले मुख्य रूप से भेदभाव किए जाते हैं। इस समय एसडीओ कोर्टों में 7 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनका समाधान करना आवश्यक है। नए नियम के तहत, सुनवाई के दौरान कांग्रेस अधिकारी और क्लर्क सहित न्यायालय से जुड़े सभी कर्मचारी पूरी तत्परता से काम करेंगे।
राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि यह कदम सिर्फ लंबित मामलों को कम करने के लिए नहीं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए भी आवश्यक है। इससे न्यायालयों के प्रति जनता का विश्वास बढ़ेगा और न्याय की पहुँच सरल होगी।
प्रदेश के राजस्व न्यायालय सचिवालय ने बताया कि सुनवाई के 4 घंटे के सत्र के दौरान सभी मामले सुव्यवस्थित तरीके से देखे जाएंगे। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन और तकनीकी सहायता भी प्रदान की गई है। न्यायाधीशों ने भी इस बदलाव का स्वागत किया है तथा सरकार को सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
राजस्थान में भूमि विवाद और अन्य राजस्व संबंधी मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसलिए इस तरह के निर्देश न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए जरूरी माने जा रहे हैं। आगे की योजना में डिजिटल सुनवाई और रिकॉर्ड के रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिससे कार्यक्षमता और भी बेहतर होगी।
इस नए व्यवस्था से न्यायालयों में मामलों की लंबित सूची में कमी आने की उम्मीद है और इसी के साथ न्यायिक प्रणाली का स्तर भी बेहतर होगा। आम नागरिकों के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव होगा जो अधिक न्यायसंगत और समयबद्ध न्याय की प्राप्ति सुनिश्चित करेगा।




