राजस्थान में अफीम तुलाई: चित्तौड़गढ़ के 303 और प्रतापगढ़ के 425 किसानों ने कराई तुलाई, चेहरे खिले खुशी से

चित्तौड़गढ़, राजस्थान | रविवार
चित्तौड़गढ़ जिले के अफीम काश्तकारों के लिए रविवार का दिन खुशी और मेहनत से भरा रहा। नारकोटिक्स विभाग द्वारा अफीम तुलाई कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया, जो किसानों के लिए महत्वपूर्ण क्षण था। इस अवसर पर जिला नारकोटिक्स परिसर में पहले दिन कुल 303 काश्तकारों ने अपनी उपज अविलंब तुलाई करवाई, जो कृषि उत्पादन के उचित मूल्य पर आधारित है।
शुभारंभ के समय विभाग ने किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। तपती धूप से बचाव के लिए शामियानों का अच्छा प्रबंध किया गया, जिससे किसानों को प्राकृतिक कठिनाइयों से राहत मिली। वहीं, काश्तकारों को लंबे समय तक कतार में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए भी अनूठी व्यवस्थाएँ की गईं, जो इस प्रक्रिया को सहज और प्रभावी बनाती हैं।
नारकोटिक्स विभाग ने इस तुलाई कार्य को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने का संकेत दिया है। अफीम उत्पादन करने वाले किसान लंबे समय से उचित मूल्य और तुलाई के इंतजार में थे, जिसे लेकर विभाग की यह पहल किसानों के लिए राहत और उत्साह का सबब बनी।
इसी क्रम में, प्रतापगढ़ जिले में भी तुलाई का कार्य जोर-शोर से जारी है। यहां रविवार को 425 किसानों ने अपनी अफीम की फसल तुलाई के लिए प्रस्तुत की, जो पूरे विभागीय प्रयासों को सफलतापूर्वक दर्शाता है।
किसानों का कहना है कि यह तुलाई कार्य उनकी मेहनत का सम्मान है और इससे उन्हें उचित भुगतान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। मौके पर अफीम तुलाई कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफीम तुलाई का यह आयोजन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करेगा, बल्कि राज्य की कृषि नीति में भी इसे एक सकारात्मक कदम माना जाएगा। नियोजित कार्यप्रणाली से किसानों का समय बचा है तथा उन्हें धूप और गर्मी से बचाव भी मिला है, जो इस तरह के कार्यक्रमों के लिए मिसाल है।
आगामी दिनों में भी यह तुलाई कार्य राज्य के अन्य जिलों में नियमित रूप से जारी रहेगा, जिसका लाभ अधिक से अधिक अफीम किसानों को मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस बार की तुलाई प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी रहेगी, जिससे कुल मिलाकर राजस्थान के अफीम उत्पादकों की समृद्धि सुनिश्चित होगी।




