
टोंक । वर्तमान में जिले में मूंग की फसल पर पीला मोजेक रोग का प्रकोप देखा जा रहा हैं । यह एक विषाणु जनित रोग हैं जो मूंग के साथ-साथ मोठ, उड़द, सोयाबीन आदि में भी नुकसान पहुंचाता हैं। इस रोग के कारण पत्तियों पर चितकबरा पीलापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं एवं कभी-कभी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं एवं रोगी पौधों में फलियां विकृत हो जाती हैं एवं फलियां कम बनती हैं। रोग का शुरुआती अवस्था में प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार रुक जाती हैं। यह रोग रस चूसक कीटों विशेषकर सफेद मक्खी के द्वारा फैलता हैं।
एग्री क्लिनिक एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, टोंक के प्रभारी डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि मूंग, मोठ, चंवला व उड़द खरीफ में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलें हैं। मूंग की फसल पर कई हानिकारक कीटों व रोगों का प्रकोप होता हैं। इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए रोगी पौधों को खेत से हटाकर नष्ट कर देवें एवं रोग वाहक रस चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए 150 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. अथवा 200 ग्राम फ्लोनीकामिड 50 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. अथवा 1 लीटर डायमिथोएट 30 ई.सी. का घोल बनाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें एवं दूसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें। छिड़काव करते समय सदैव कृषि रसायनों को उपयोग करते समय हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क तथा पूरे वस्त्र पहने एवं मौसम साफ होने पर ही छिड़काव करें ।



