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वृद्ध आश्रम में रह रही 97 वर्षीय मां का निधन

संचालक ने निभाया बेटे का फर्ज

भरतपुर।बयाना: क्षेत्र के पहरिया मुर्रकी स्थित श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम में शुक्रवार को उस समय शोक की लहर फैल गई, जब आश्रम में रह रही 97 वर्षीय वृद्धा बसंती शर्मा का देवलोक गमन हो गया। वृद्धा के निधन की खबर मिलते ही आश्रम में मौजूद वृद्धजन, कार्यकारिणी सदस्य और सेवा कार्य से जुड़े लोग भावुक हो उठे। आश्रम परिवार ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

जानकारी के अनुसार बसंती शर्मा मूल रूप से होशंगाबाद, बिहार की निवासी थीं और पिछले लगभग दो वर्षों से श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम में रह रही थीं। वह 14 मई 2024 को आश्रम में आई थीं। आश्रम में रहने के दौरान सभी लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते थे। वृद्धा के निधन के बाद पूरे आश्रम में गहरा दुख व्याप्त हो गया।

वृद्ध आश्रम संचालक राधेलाल शर्मा ने उनका अंतिम संस्कार कराया और स्वयं मुखाग्नि दी। इस दौरान आश्रम परिवार और स्थानीय लोगों की आंखें नम दिखाई दीं। अंतिम संस्कार में वासुदेव शर्मा, त्रिलोक चंद्र उपाध्याय, निरंजन शर्मा, आनंद गुप्ता, तिमन पटेल, सतीश मदनपुर वाले, सुरेश चंद महमदपुर वाले, पिंटू मेहरौली वाले सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

राधेलाल शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि वृद्ध आश्रम में रहने वाले सभी वृद्धजन उनके परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि बसंती शर्मा को मुखाग्नि देकर उन्हें पुत्र होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात का दुख है कि हमारी यह वृद्ध मां अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन इस बात का संतोष भी है कि मुझे एक पुत्र का फर्ज निभाने का अवसर मिला। हमने आश्रम में उनकी पूरी सेवा की और परिवार की तरह उनका ध्यान रखा।”

उन्होंने आगे कहा कि आश्रम में रहने वाले सभी वृद्धजनों की सेवा पूरे समर्पण भाव से की जाती है। यहां किसी को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाता। सभी वृद्धजन एक परिवार की तरह रहते हैं और उनकी देखभाल परिवार के सदस्य की तरह ही की जाती है।

त्रिलोकचंद उपाध्याय ने बताया कि श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि एक परिवार है। यहां रहने वाले वृद्धजन और कार्यकारिणी सदस्य आपस में गहरे भावनात्मक संबंध से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के किसी सदस्य के निधन पर जिस प्रकार दुख होता है, उसी प्रकार आज पूरे आश्रम परिवार को गहरा दुख है।

आनंद गुप्ता ने कहा कि जीवन और मृत्यु प्रकृति का अटल नियम है। दुनिया में जो आया है उसे एक दिन जाना ही पड़ता है, लेकिन जब परिवार का कोई सदस्य साथ छोड़कर जाता है तो पीड़ा स्वाभाविक होती है। उन्होंने कहा कि बसंती शर्मा आश्रम परिवार का हिस्सा थीं और उनके निधन से सभी लोग दुखी हैं।

आश्रम में मौजूद अन्य लोगों ने भी बसंती शर्मा के जीवन को सरल और स्नेहपूर्ण बताया। सभी ने कहा कि वह शांत स्वभाव की थीं और आश्रम के सभी लोगों के साथ आत्मीयता से रहती थीं। उनके निधन से आश्रम में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।

श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम लंबे समय से निराश्रित और जरूरतमंद वृद्धजनों की सेवा का कार्य कर रहा है। यहां वृद्धों को रहने, भोजन, उपचार और देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। आश्रम संचालक और कार्यकारिणी सदस्य लगातार सेवा कार्य में जुटे रहते हैं। स्थानीय लोग भी समय-समय पर आश्रम पहुंचकर सहयोग करते रहते हैं।

बसंती शर्मा के निधन के बाद आश्रम परिसर में शोक का माहौल बना रहा। अंतिम संस्कार के दौरान सभी लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।

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