जोधपुर

मंडी भाव: जीरा-सौंफ के दामों में भारी跌ाव, 15 दिन में जीरा 4 हजार रुपए गिरा, जानिए ताजा मंडी भाव

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जोधपुर। बिलाड़ा कृषि मंडी में इन दिनों असामान्य सन्नाटा देखने को मिल रहा है। जीरा और सौंफ के गिरते दामों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और निर्यात में आई कमी का सीधा असर स्थानीय मंडियों पर पड़ा है, जिसके चलते पिछले 15 दिनों में जीरे के भाव लगभग 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं।

किसानों और व्यापारियों के मुताबिक, पिछले माह तक जीरे का भाव ₹20,000 प्रति क्विंटल के आसपास था, लेकिन निर्यात में कमी के कारण इसकी कीमतें गिरावट की ओर बढ़ गईं। इसी तरह सौंफ के दाम भी कमजोर मार्केट के चलते बेहतरीन गुणवत्ता के बावजूद कुछ कम हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात पर नियंत्रण और वैश्विक मांग में गिरावट के कारण जीरा और सौंफ के भावों में अस्थिरता आई है। कोविड-19 की वजह से उत्पन्न वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं ने भी इसका प्रभाव बढ़ाया है।

स्थानीय व्यापारी भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश में लगे हुए हैं, पर निर्यात बाजार में अनिश्चितता की वजह से भावों में स्थाई सुधार अभी संभव नहीं दिख रहा। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों का सही मूल्य प्राप्त करने के लिए मंडी के साथ-साथ थोक बाजारों पर भी नजर रखें।

बिलाड़ा मंडी समितियों ने भी किसानों और व्यापारियों के लिए नई नीतियों पर विचार शुरू कर दिया है ताकि भावों में स्थिरता लाई जा सके और किसानों को उनका हक मिल सके। अभी के लिए, जीरा अभी भी प्रमुख कृषि उत्पाद है, जबकि सौंफ की मंडी में भी हल्की मंदी देखी जा रही है।

इस समय बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जैसे ही वैश्विक बाजार में मांग बढ़ेगी, उतनी ही जल्दी स्थानीय मंडियों में भी दाम सुधार होंगे। किसानों को संयम बनाए रखकर अपनी फसल की गुणवत्ता बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि भावों में सुधार होने पर उन्हें लाभ मिल सके।

कुल मिलाकर, मंडी में इस समय न केवल भाव गिरावट का दौर है, बल्कि यह किसानों के लिए एक चुनौती भी प्रस्तुत करता है। निर्यात बाजार की स्थिति पर पूरी नजर रखने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी नए विकल्प तलाशने होंगे जिससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत बने रहें।

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