चित्तौरगढ़

राजस्थान के गांधीसागर में करंट से मछली शिकार कर रहे थे बंगाल के तस्कर, मगरमच्छों की भी हुई मौत; हुआ बड़ा खुलासा

गांधीसागर बैकवाटर, जो चंबल की लहरों और जलीय जीवों के लिए सुरक्षित माना जाता है, इन दिनों एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। पश्चिम बंगाल के शातिर तस्कर जो यहां मछलियों का अवैध शिकार कर रहे थे, उनकी कार्रवाई ने जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचाया है। मुनाफे की लालसा में तस्करों ने पानी में करंट छोड़कर मछलियों का शिकार करने का खौफनाक तरीका अपनाया, जिससे न केवल मछलियां मारी गईं, बल्कि बेजुबान मगरमच्छ भी अपनी जान गंवा बैठे।

गांधीसागर का बड़ा हिस्सा राजस्थान के कोटा, चित्तौड़गढ़ और मध्यप्रदेश के मंदसौर जिलों में फैला हुआ है। इस क्षेत्र की जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा से प्रयास होते रहे हैं, लेकिन बंगाल से आए ये तस्कर अपनी नापाक सोच के साथ यहां आए। वे बिजली का करंट छोड़ते थे, जिससे मछलियां बेहोश होकर पानी के ऊपर आ जाती थीं, जिन्हें वे आसानी से पकड़ लेते थे।

इस अवैध शिकार के कारण स्थानीय जैव विविधता को गहरा नुकसान पहुंचा है। मगरमच्छ, जो इस क्षेत्र के पर्यावास के प्रमुख प्राणी हैं, करंट की चपेट में आने से मारे जा रहे हैं। उनके मरने से पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन आने का खतरा है, जो आने वाले समय में भारी पड़ सकता है।

चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा इलाके में पुलिस और वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और उनके अवैध उपकरण जब्त किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के कृत्य न सिर्फ पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, बल्कि कानूनी अपराध भी हैं, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय मछुआरे भी इस समस्या से बेहद परेशान हैं क्योंकि करंट से मछलियों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे उनका रोजगार भी प्रभावित हो रहा है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन अब इस क्षेत्र की बेहतर निगरानी के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं ताकि इस कुप्रथा को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही सतत विकास की कुंजी है। अवैध और गैर-पर्यावरण अनुकूल तकनीकों से जलीय जीवन और स्थानीय समुदाय दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए, जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सख्त कानूनों पर अमल करने की जरूरत है।

समापन में कहा जा सकता है कि गांधीसागर के जीवमंडल की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा। तस्करों के खतरनाक कृत्यों को रोकना न केवल जैव विविधता के संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह राजस्थान और मध्यप्रदेश के हजारों लोगों के आजीविका के लिए भी जरूरी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन की कड़ी कार्रवाई से इस प्रकोप पर जल्द नियंत्रण पाया जाएगा।

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