चित्तौरगढ़

राजस्थान समाचार: 8 वर्षों बाद घर लौटे राघव, चेहरे पर न मुस्कान न कंधों पर बैग, केवल ताबूत और सिसकियां

चित्तौड़गढ़ की बेगूं से आई दुखद खबर ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। सात समंदर पार कनाडा में सुनहरे भविष्य के सपने संजोने गए 32 वर्षीय राघव सोनी की अचानक मृत्यु ने परिवार सहित पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। दो सप्ताह पहले कनाडा की ठंडी हर्ट लेक झील के किनारे उनकी जान चली गई। अब उनका पार्थिव शरीर वापस अपने जन्मभूमि बेगूं पहुंचा, परन्तु वह खुशी नहीं, बल्कि अपार दुःख लेकर आया है।

राघव की मौत की खबर सुनते ही परिवार के सदस्यों के चेहरे से मुस्कान दूर हो गई और उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। 8 वर्षों बाद पुत्र के घर लौटने का इंतजार था, लेकिन वे ताबूत में आए, जिसके कारण सभी सदमे में हैं। खुदरा व्यापार के लिए कनाडा गए राघव ने अपने सपनों को बड़ा आकार देने की उम्मीद की थी, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा।

राघव के पिता सत्यनारायण सोनी ने बताया, “हम सब उसके स्वस्थ लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे। परंतु कड़वी सचाई सामने आई। आंखों के सामने बेटा ताबूत में लौट आया, जो हम सभी के लिए एक असहनीय क्षण है।” उन्होंने आगे कहा कि राघव का जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।

स्थानीय प्रशासन और समाज के लोग भी इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और परिवार के प्रति समर्थन का आश्वासन दे रहे हैं। राजकीय अस्पताल की ओर से भी शव परीक्षण प्रक्रिया पूरी कराई गई। भारत सरकार और कनाडा में भारतीय दूतावास की मदद से राघव का शव सुरक्षित रूप से भारत लाया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्ट लेक झील क्षेत्र की सर्दी और पर्यावरण संबंधी कठिनाइयों के कारण राघव की मृत्यु संभवत: स्वास्थ्य समस्याओं या दुर्घटना के कारण हुई है, जिनकी जांच जारी है। परिवार की इच्छा है कि सरकार इस तरह के छात्र-पर्यटकों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे।

यह दुखद घटना न केवल बेगूं बल्कि पूरे चित्तौड़गढ़ जिले के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के विदेशों में सुरक्षित व सफल भविष्य के लिए उनकी तैयारी और सुरक्षा पर सरकार और परिवारों को ज्यादा ध्यान देना होगा। परिवार का कहना है कि वे राघव के सपनों को याद रखेंगे और उसके नाम पर कुछ सकारात्मक पहल करना चाहते हैं जिससे उसके जैसी त्रासदी दोबारा न हो।

इस प्रकार यह कहानी एक युवा के सपनों, परिवार के आशाओं और दुर्भाग्य का मार्मिक संगम है। समाज और सरकार को मिलकर इस प्रकार की घटनाओं से निराश्रित परिवारों के लिए सहारा बनना होगा ताकि वे इस पीड़ा को सहन कर सकें और भविष्य में बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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