चित्तौरगढ़

चित्तौड़गढ़: भू-माफियाओं का खेल—लापता किसान की जगह ‘फर्जी रत्न’ बनाकर हुई रजिस्ट्री, 32 साल बाद खुला बड़ा घोटाला

राजस्थान के बेगूं उपखंड के हरिपुरा गांव में एक शर्मनाक भूमि रजिस्ट्री घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला 32 वर्षों पुराना है, जब एक किसान लापता हो गया था। उसी किसान के नाम पर एक हमनाम को खड़ा किया गया और फिर उसके नाम पर लाखों की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई।

यह पूरा साजिश भू-माफियाओं के दुस्साहस और दलालों की मिलीभगत का परिणाम बताया जा रहा है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री की गई, वे पूरी तरह नकली थे। दलालों ने इलाके के कमजोर प्रशासन और कमजोर कानूनी प्रावधानों का फायदा उठाकर देशी तندूर की तरह जमीन के सौदे पार लगा दिए।

साल 1992 में हरिपुरा गांव के एक किसान अचानक लापता हो गया था। स्थानीय प्रशासन द्वारा कुछ आधारभूत कार्रवाई तो हुई, लेकिन सही ढंग से उसकी खोजबीन नहीं हो सकी। इस बीच, उसे जान पहचान वाले लोगों ने मृत घोषित माना। इसी का लाभ भू-माफियाओं ने उठाया। लापता किसान के हमनाम का फर्जी दाखिला लेकर, उसके नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा दी गई।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भू-माफियाओं ने गांव के कमजोर और गरीब परिवारों की जमीन को निशाना बनाया है। दिल्ली या अन्य शहरों से आए दलाल, नकली दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये के सौदे करते रहे और प्रशासन की अनदेखी का पूरा फायदा उठाया।

सरकारी अधिकारीयों ने कहा है कि यह मामला गंभीर है और जांच एजेंसियों को सक्रिय कर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या दलाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए भी सुझाव दिए जाएंगे।

इस घोटाले का खुलासा होने के बाद गांव में भारी आक्रोश है। लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और भू-माफिया और दलालों को बख्शे जाने के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वे त्वरित कार्रवाई करें और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

भू-माफियाओं द्वारा किया गया यह खेल न केवल स्थानीय किसानों के हितों के खिलाफ है, बल्कि ग्रामीणों के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। यह मामला साफ दर्शाता है कि भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी कितनी आवश्यक है।

न्याय की इस लड़ाई में गांव के लोग एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे। प्रशासन भी जुटा है इस मामले को सुलझाने में ताकि कमजोर वर्गों को न्याय मिल सके और भू-माफियाओं की मनमानी रुकी जा सके।

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