चित्तौरगढ़

चित्तौड़गढ़ में किसानों की निराली कहानी: शादी में टिटहरी के अंडों की सुरक्षा के लिए पंडाल में लगाया गार्ड

चित्तौड़गढ़। आजकल जहां छोटी-छोटी बातों पर इंसानियत शर्मसार होती दिखती है, वहीं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में एक किसान ने प्रकृति और जीवों के प्रति अपनी संवेदनशीलता से सबका दिल जीत लिया है। जियाखेड़ी गांव के उदयलाल व्यास के परिवार में सोमवार को एक साथ तीन शादियां हुईं – उनके बेटे और दो बेटियों की। पर्व जैसा लग रहा यह अवसर एक अनूठी घटना के कारण विशेष रूप से यादगार बन गया।

शादी का भव्य पंडाल सजाया गया था, जहां स्थानीय लोग और रिश्तेदार खुशी में डूबे थे। लेकिन इस खुशियों के बीच मौजूद था परिवार का एक छोटा, नाजुक मेहमान – एक नन्ही टिटहरी और उसके चार अंडे। टिटहरी, जो आमतौर पर गांव के खेतों और पहाड़ियों में देखी जाती है, इस बार पंडाल के बिलकुल पास अपने घोंसले में अंडे दे चुकी थी।

किसान उदयलाल व्यास की दयालुता और सोच ने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने न केवल इस छोटी सी जान की सुरक्षा के लिए पूरे पंडाल की व्यवस्था बदली, बल्कि सुरक्षा के लिए एक गार्ड भी तैनात किया। शादी में आए मेहमानों को भी अनुरोध किया गया कि वे टिटहरी और उसके अंडों को नुकसान न पहुंचाएं, ताकि वह निर्भय होकर अपने घोंसले में रह सके।

जियाखेड़ी गांव के अन्य लोग भी उदयलाल के इस कदम की प्रशंसा कर रहे हैं। कहते हैं कि इस तरह की संवेदनशीलता आजकल कम ही देखने को मिलती है। स्थानीय वन विभाग के अधिकारी भी इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक प्रेरणादायक उदाहरण बता रहे हैं।

शादी में मौजूद लोगों ने बताया कि टिटहरी की देखभाल का विशेष प्रबंध देखकर वे भावुक हो उठे। जहां बड़े पैमाने पर शादियों में केवल उत्सव और भोग-विलास की बातें सुनने को मिलती हैं, वहीं जियाखेड़ी की यह शादी प्रकृति प्रेम का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गई।

किसान उदयलाल व्यास ने कहा, “हमारे लिए प्रकृति का सम्मान सबसे बड़ा है। शादी जैसे खुशी के मौके पर भी हमें जीव-जंतुओं का ख्याल रखना चाहिए। मेरा मानना है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।”

यह घटना न केवल चित्तौड़गढ़ में बल्कि पूरे राजस्थान में मानवता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएगी। कई लोग इसे गांव की और ग्रामीणों की सोच में सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

इस अनोखी कहानी ने साबित कर दिया है कि अगर हम मिलकर अपने आस-पास के प्राणियों की रक्षा करें तो समाज और प्रकृति दोनों का कल्याण हो सकता है। उदयलाल व्यास और उनके परिवार का यह कदम सबके लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना है, जो आने वाले समय में अन्य लोगों तक भी यह संदेश पहुंचाएगा कि प्रकृति के लिए संवेदनशील रहना हम सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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