‘आयरन मैन’ श्रीकृष्ण रावल ने 16 हिमालयी चोटियां फतह कर इतिहास रचा, मौत को नज़रअंदाज किया

संकल्प और साहस की मिसालः 51 वर्षीय श्रीकृष्ण रावल का हिमालय विजय अभियान
चित्तौड़गढ़ के 51 वर्षीय पर्वतारोही श्रीकृष्ण रावल ने हिमालय की 16 दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराकर न केवल अपनी ताकत का परिचय दिया है, बल्कि यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। रावल का यह साहसिक अभियान 20 वर्षों की कठोर मेहनत और समर्पण का परिणाम है, जो ऊँचे पर्वतों की बर्फीली ठंड और तूफानों के बीच भी निरंतर जारी रहा।
श्रीकृष्ण रावल का जन्म और पालन-पोषण चित्तौड़गढ़ में हुआ। सामान्य जीवन के बजाय उन्होंने चुनौतियों भरे पहाड़ों को अपना लक्ष्य बनाया। उम्र के उस पड़ाव पर जहां अधिकांश लोग आराम और रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, वहीं रावल लगातार हिमालय की चढ़ाई कर रहे हैं। उनका मानना है, “संकल्प के आगे हिमालय भी बौना है।”
उनका पर्वतारोहण केवल शारीरिक चुनौती नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा है। हिमालय की ऊँची-ऊँची चोटियों पर पहुंचना आसान नहीं। यहां तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और ऑक्सीजन की कमी जैसी कई आपदाएं हैं। फिर भी श्रीकृष्ण रावल ने हार नहीं मानी। कई बार मौत की कगार पर आने के बावजूद उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए।
20 सालों में उन्होंने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और जीत भी हासिल की। हर एक चोटी पर तिरंगा फहराते हुए उनका लक्ष्य देशभक्ति को भी बढ़ावा देना रहा। यह यात्रा केवल पर्वतारोहण की नहीं, बल्कि अजेय जिजीविषा, साहस, और आत्मविश्वास की कहानी है।
श्रीकृष्ण रावल की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वे कहते हैं, “चाहे उम्र कुछ भी हो, हिम्मत और मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। मैं चाहता हूं कि लोग इस बात को समझें कि जीवन में हार केवल तब होती है जब आप कोशिश करना छोड़ देते हैं।”
उनकी इस उपलब्धि ने ना केवल चित्तौड़गढ़ बल्कि पूरे भारत में एक नई ऊर्जा और उम्मीद जगाई है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें भी सम्मानित किया गया है। उनके प्रयासों से यह संदेश भी मिलता है कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं, बशर्ते हम उसे पाने के लिए पूरी लगन और समर्पण के साथ प्रयास करें।
श्रीकृष्ण रावल की यह कहानी एक बार फिर साबित करती है कि जब संकल्प मजबूत हो, तो सबसे ऊंचे पर्वत भी जीत लिए जाते हैं। उनकी यह अद्भुत यात्रा अनगिनत लोगों को अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा देती रहेगी।




