चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में एक महीने में 41 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व चढ़ावा, सात चरणों में पूरी हुई गिनती

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर ने फिर से भक्तों की गहरी आस्था और समर्पण का परिचय दिया है। शुक्रवार को मंदिर के मासिक भंडार की सात चरणों में विस्तृत गिनती पूरी की गई, जिसमें इस बार रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावे का खुलासा हुआ है। एक महीने के दौरान मंदिर में कुल 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपये के भंडार का हिसाब सामने आया है।
मंदिर में मिली नकद राशि के साथ ही बड़ी मात्रा में सोना और चांदी के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को चढ़ाए गए। यह राशि मंदिर प्रबंधन के लिए एक नई मिसाल साबित हुई है, जो भक्तों की भक्ति और उनकी आर्थिक सहयोग की पुष्टि करती है। मंदिर में इस विशाल धनराशि की गिनती सात फेरे लेकर पूरी की गई, जिसमें बैंक अधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
सांवलिया सेठ मंदिर की मासिक कमाई पिछले वर्षों से निरंतर बढ़ती जा रही है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह वृद्धि न केवल धार्मिक आस्था बढ़ने के कारण है, बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जिससे यहां की आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है। इस धनराशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, सेवा कार्यों और स्थानीय सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जाता है।
मंदिर के मुख्य प्रसाधक नवनीत सिंह ने बताया कि भक्तों की बढ़ती आस्था और प्रयासों के कारण ही यह अप्रूर्त फल प्राप्त हुआ है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया और कहा कि मंदिर की परंपराओं और धार्मिक गतिविधियों को इसी उत्साह से जारी रखा जाएगा।
भगवान सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास भी बेहद प्राचीन और गौरवपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक एवं सामाजिक दृष्टि से भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां के भक्त नियमित रूप से आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए मंदिर में चढ़ावा अर्पित करते हैं।
मंदिर के आस-पास के बाजारों और क्षेत्रों को भी इस व्रद्धि का लाभ मिला है। स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी के अवसर बढ़े हैं और छोटे व्यापार में भी तेजी आई है। इसके साथ ही मंदिर के भंडार की इस बड़ी राशि ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा और आस्था की गहराई आज भी मजबूत बनी हुई है।
सांवलिया सेठ मंदिर में हुई इस अभूतपूर्व आर्थिक उपलब्धि ने सभी के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बना है, जो यह दर्शाता है कि योग्यता और समर्पण के साथ किस तरह धार्मिक संस्थान समुदाय के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास का माध्यम बन सकते हैं। मंदिर आगामी वर्षों में भी इसी प्रकार की सफलता की कामना करता है।




