राजसमंद

350 साल पुरानी विरासत संकट में: राजसमंद झील की पाल जर्जर, खतरा बढ़ा, मिट्टी के बांध अंदर से खोखले हुए

राजसमंद। मेवाड़ की गौरवशाली इतिहास और संगमरमर के लिए प्रसिद्ध राजसमंद झील आज अपनी अस्तित्व रक्षक भूमिका के संकट में है। सत्रहवीं शताब्दी में बनकर निर्मित यह झील, जो अपनी विशालता और स्थापत्य कला के कारण क्षेत्र की एक अनमोल धरोहर मानी जाती है, अब जर्जर संरचना के कारण गंभीर खतरे से दो-चार हो रही है।

राजसमंद झील संरक्षण अभियान के समन्वयक दिनेश श्रीमाली ने हाल ही में केंद्र और राजस्थान सरकार को पत्र भेजकर झील की तत्काल मरम्मत और संरक्षण की मांग की है। श्रीमाली ने बताया कि झील की पाल (मिट्टी का बांध) के अंदरूनी हिस्से में गंभीर दरारें और खोखलापन उत्पन्न हो चुका है, जिससे झील के टूटने का खतरा उत्पन्न हो रहा है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भारी नुकसान झेल सकती है।

वर्तमान में राजसमंद झील की पाल की हालत ऐसी हो गई है कि बारिश या किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान इसका टूट जाना क्षेत्र में व्यापक जल संकट और जनजीवन प्रभावित कर सकता है। स्थानीय लोगों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जाहिर की है, क्योंकि यह झील न केवल सिंचाई का स्रोत है बल्कि यहां की पारिस्थितिक प्रणाली और पर्यटन को भी मजबूती देने वाला प्रमुख आधार है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस जलधरोहर की संरचना को तत्काल तकनीकी निगरानी और मजबूत संरक्षणात्मक उपायों की आवश्यकता है। इस हेतु सरकार को चाहिए कि वे विशेषज्ञ टीम गठित कर झील की स्थिति का विस्तृत सर्वेक्षण कराकर मरम्मत कार्य शुरू करें। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण के तहत नियमित निगरानी और संरक्षण कार्यक्रम भी लागू किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार के संकट से बचा जा सके।

राजसमंद के निवासियों और इतिहास प्रेमियों में गहरी चिंता व्याप्त है, और वे उम्मीद करते हैं कि सरकार शीघ्र कार्रवाई कर इस 350 वर्ष पुरानी विरासत को बचाने हेतु ठोस कदम उठाएगी। यह जलधरोहर न केवल मेवाड़ की पहचान है, बल्कि राजस्थान के सांस्कृतिक इतिहास का अभिन्न हिस्सा भी है।

सरकारी अधिकारियों ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि शीघ्र ही राजसमंद झील के जीर्णोद्धार के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और संरक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। इस दिशा में संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है।

मूलतः, राजसमंद झील का संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकतानुसार ही नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए भी अतिआवश्यक है। यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया, तो यह 350 वर्षों से चली आ रही मेवाड़ की शान खतरे में पड़ सकती है।

Related Articles

Back to top button