डूंगरपुर

डूंगरपुर : ‘जीरामजी’ में बड़ी तकनीकी खामी, नाराज मेट-मजदूरों ने प्रदर्शन कर भजनलाल सरकार को किया सचेत

डूंगरपुर, 27 अप्रैल: केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जीरामजी’ में तकनीकी खामी के कारण पिछले चार दिनों से ऑनलाइन हाजिरी अपडेट नहीं हो पा रही है। इस तकनीकी समस्या ने डूंगरपुर जिले के साबला क्षेत्र में मेट और मजदूरों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। मेट-मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया और ब्लॉक की 31 पंचायतों के प्रतिनिधि सड़कों पर उतर आए।

मेट-मजदूरों का आरोप है कि तकनीकी खामी के कारण वे अपनी हाजिरी नहीं दर्ज कर पा रहे हैं, जिससे उनके वेतन में देरी हो रही है और आर्थिक तंगी बढ़ रही है। इसके चलते उन्होंने तेज आवाज में अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन और सरकार दोनों को सचेत किया है।

प्रदर्शनकारियों ने उपखंड अधिकारी अभिलाषा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने इस समस्या का त्वरित समाधान करने और योजना को सुचारू रूप से चलाने की मांग की। ज्ञापन में तकनीकी खामियों को दूर करने, मेट-मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और एक पारदर्शी व्यवस्था बनाए जाने की बात भी शामिल थी।

उपखंड अधिकारी अभिलाषा ने कहा कि यह समस्या प्रशासन को भी ज्ञात है और तकनीकी टीम उससे निपटने के लिए काम कर रही है। जल्द ही सभी त्रुटियाँ ठीक कर दी जाएंगी ताकि मेट-मजदूरों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही, सरकार भी इस मामले को गंभीरता से देख रही है और शीघ्र समाधान के लिए सभी स्तरों पर कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

इस प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि में न पड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार एवं विभागीय अधिकारी समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं और जल्द ही सभी परेशानियों का अंत होगा।

यह तकनीकी खामी मेट-मजदूरों की रोज़गार से जुड़ी मौलिक जरूरतों से जुड़े मामले में आने वाली गंभीर बाधा सिद्ध हो रही है। ऐसे में उनसे जुड़े हितधारकों की आवाज़ को गंभीरता से लेना और समय पर समाधान करना अत्यंत आवश्यक होगा ताकि योजना के उद्देश्य पूरे हो सकें और लाभार्थी बिना किसी समस्या के अपनी सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि तकनीकी आधार पर चल रही योजनाओं में सुधार और उनके निर्बाध संचालन के लिए प्रभावशाली तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों की आवश्यकता है। साथ ही संवेदनशील समूहों की समस्या पर तुरंत ध्यान देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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