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राजसमन्द: CBSE की 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा में खेल! परीक्षा के नाम पर निजी स्कूल मांग रहे 3 महीने की फीस

राजसमन्द, राजस्थान: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। विशेष तौर पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की इस वर्ष शुरू की गई कक्षा 10वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा को कुछ निजी स्कूलों द्वारा कथित तौर पर वसूली का माध्यम बनाया जा रहा है।

अभिभावक बताते हैं कि बोर्ड परीक्षा के दौरान अतिरिक्त फीस का दबाव बनाया जा रहा है, जो मूलतः स्कूल फीस के अलावा तीन महीने की अतिरिक्त राशि के रूप में वसूली जा रही है। इस मुद्दे ने शिक्षा के क्षेत्र में वाणिज्यिकरण को लेकर चिंता पैदा कर दी है। कई अभिभावकों का कहना है कि महामारी के बाद आर्थिक परेशानियों के बीच ये अतिरिक्त शुल्क उनके लिए गंभीर चुनौती बन गया है।

सीबीएसई ने परीक्षा शुल्क सम्बन्धी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन कई निजी स्कूल अपने सुविधा के अनुसार अलग शुल्क लेने की कोशिश में लगे हैं। इससे छात्र परिवारों की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने इस विषय में उच्च शिक्षा बोर्ड और स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि इस प्रकार की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं को परीक्षा केंद्रों पर अधिक पारदर्शिता और नियामकीय नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि निजी संस्थान फीस वसूली के नाम पर छात्रों और अभिभावकों का शोषण न कर सकें। शिक्षा केवल ज्ञान का मंदिर होना चाहिए, ना कि आय कमाने का साधन।

स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने इस मुद्दे पर जांच शुरू करने की जानकारी दी है और सभी संबंधित स्कूलों को नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक फीस वसूली को लेकर सीबीएसई के आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करें।

इस प्रकार की समस्याएं केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश में देखी जा रही हैं जहां कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के समय निजी स्कूल फीस और अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर विवाद उभरते रहते हैं। इसका समाधान शिक्षा नीति में सुधार और कड़े अनुपालन से ही संभव है।

अंततः, शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की आर्थिक मनमानी न हो, इसके लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा और परीक्षार्थियों व अभिभावकों को बिना दबाव के गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

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