जोधपुर

निगहबान जन उत्सव में सरकारी एजेंसियों की उदासीनता क्यों

जोधपुर, राजस्थान – धींगा गवर मेला, जोधपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अनूठा संगम है, जो मारवाड़ क्षेत्र की आस्था और संस्कृति को समर्पित है। यह मेला महिलाओं की शक्ति और सम्मान का प्रतीक है, जहां पूरे आयोजन में महिलाओं का प्रमुख योगदान और सहभागिता देखने को मिलती है। इस मेले की खासियत यह है कि यह देश का एकमात्र ऐसा उत्सव है, जिसमें पूरी रात महिलाओं का राज होता है।

धींगा गवर मेला कुल 18 दिनों तक चलता है, जिसमें 16 दिनों तक गणगौर पूजन होता है और इसके बाद दो दिनों का भव्य मेला आयोजित किया जाता है। यह धार्मिक आयोजन न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। मेले की भव्यता, परंपरागत रीति-रिवाज, और सामाजिक कार्यक्रम इसे मारवाड़ की सांस्कृतिक धड़कन बनाते हैं।

इस मेले के दौरान महिलाओं द्वारा किए जाने वाले रीति-रिवाजों, नृत्य, संगीत, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से यह स्पष्ट होता है कि यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण है। महिलाओं के लिए यह अवसर है अपनी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने का, साथ ही सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का भी।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण मेले को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों की उदासीनता चिंता का विषय है। आयोजकों और स्थानीय समुदाय के अनुसार, सरकारी समर्थन और सहयोग कम होना इस उत्सव की संभावनाओं को सीमित करता है। सुरक्षा, साफ-सफाई, और संसाधनों के प्रबंध में सरकारी संस्थानों की निष्क्रियता से मेले के आयोजन एवं संचालन में कई समस्याएँ आती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों और अन्य प्राथमिकताओं के कारण इस मेले पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा सकता। वहीं, आयोजक एवं स्थानीय लोग इस स्थिति को सुधारने की मांग कर रहे हैं ताकि इस सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाया जा सके।

धींगा गवर मेला केवल एक सामुदायिक उत्सव ही नहीं बल्कि यह मारवाड़ी संस्कृति की जीवंतता, परंपरा और आस्था का जीता-जागता उदाहरण है। स्थानीय प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वे इस सांस्कृतिक प्रतीक को संरक्षण और प्रोत्साहन दें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस गौरवशाली परंपरा से परिचित हो सकें एवं इसका आनंद उठा सकें।

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