मिडिल ईस्ट तनाव का असर: खाद्य तेल 25% तक महंगा, ड्राई फ्रूट की सप्लाई ठहर गई

नागौर, राजस्थान
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते घरेलू बाजारों में महंगाई की लहर तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधा के कारण नागौर सहित प्रदेश के कई जिलों में खाद्य तेलों के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इस उछाल ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है।
व्यापारियों और स्थानीय बाजारों के अनुसार, खाद्य तेलों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधित होने से स्थानीय स्तर पर स्टॉक सीमित हो गया है। इस वजह से दुकानदार और थोक विक्रेता पुराने स्टॉक से काम चला रहे हैं, जबकि नए माल की आवक लगभग रुक गई है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है।
साथ ही, ड्राई फ्रूट की सप्लाई भी लगभग ठहर गई है। नागौर के बाजारों में ड्राई फ्रूट की नई खेपों के नहीं आने से व्यापारी असमंजस में हैं। वे मानते हैं कि जैसे-जैसे स्थिति गंभीर होती जाएगी, वैसे-वैसे इनकी कीमतें भी बढ़ेंगी। स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए यह चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि त्योहारों के सीजन में ड्राई फ्रूट की मांग बढ़ती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव यदि यथावत बना रहता है और युद्ध विराम नहीं होता है, तो आने वाले समय में खाद्य तेल, ड्राई फ्रूट सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।
नागौर के व्यापारी इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि स्थानीय प्रशासन तथा केंद्र सरकार को निर्मित हालात को देखते हुए बाजार अनियमितताओं पर निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि सामान्य उपभोक्ता को बेवजह महंगी वस्तुएं खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
स्थानीय किसान और व्यापारी इस बात से भी चिंतित हैं कि अगर स्थिति बिगड़ी तो आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे ना केवल बाजार बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो तनाव बढ़ रहा है उसका असर घरेलू बाजारों पर पहले से ज्यादा तीव्र दिखाई देने वाला है और इसे लेकर जागरूकता व सावधानी दोनों आवश्यक हो गई है।

