किसानों का हल्ला बोल: ट्रैक्टर रैली के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे, 21 सूत्री मांगों पर ज्ञापन सौंपा

नागौर, राजस्थान
नागौर जिले में सीमेंट कंपनियों की कार्यशैली और किसानों के हितों की अनदेखी के खिलाफ बुधवार को किसानों का गुस्सा सड़कों पर खुलकर देखी गई। किसान संघर्ष समिति और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयुक्त बैनर तले सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ जिला मुख्यालय नागौर पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने अपने 21 सूत्री मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा।
प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि सीमेंट कंपनियों द्वारा पर्यावरण और किसानों के हितों की अनदेखी से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। नदियों और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने से कृषि उत्पादन में कमी आई है। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण के विवाद और उचित मुआवजा न मिलने से भी किसान भारी दबाव में हैं। किसान नेताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि वे उनकी मांगों को गंभीरता से लें एवं उचित समाधान निकालकर उन्हें राहत प्रदान करें।
किसानों ने विशेष रूप से नीचे लिखी मांगों पर जोर दिया है:
- सीमेंट कंपनियों के पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कर तत्काल कार्रवाई करें।
- किसानों के खेतों में हो रहे नुकसान की भरपाई की जाए।
- जल स्रोतों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
- भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता और उचित मुआवजा सुनिश्चित हो।
- किसानों के हितों को देखते हुए विकास योजनाएं बनाई जाएं।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जोर-शोर से नारे लगाए और प्रशासन की उपेक्षा पर कड़ी नाइंसफी जताई। आयोजकों का कहना था कि यह केवल एक शुरुआत है और अगर उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया तो आगे और बड़ा संघर्ष किया जाएगा।
जिला अधिकारी ने कहा कि वे किसानों की बातों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाएंगे और जल्द से जल्द संतोषजनक समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। उन्होंने दोनों पक्षों में संवाद कायम रखने पर जोर दिया।
यह प्रदर्शन इससे पहले भी कई बार सामने आया था, लेकिन इस बार किसानों ने अपने मुद्दों को और जोर-शोर से उठाकर यह दिखा दिया कि वे अब अपनी आवाज दबने नहीं देंगे।
नागौर जिले के अन्य हिस्सों में भी किसानों ने समर्थन जताया और आने वाले दिनों में एकता को और मजबूत करने का वादा किया। इस प्रकार, यह आंदोलन न केवल किसानों के हक की लड़ाई है बल्कि पर्यावरण एवं सामाजिक न्याय की भी पुकार है।
अगले दिनों इस पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि किसानों एवं उद्योगों के बीच संतुलन बनाए रखना ही स्थायी विकास की कुंजी है।



