नागौर न्यूज़: ए-ग्रेड मंडी में सुरक्षा व्यवस्था फेल, करोड़ों के कारोबार के बीच सीसीटीवी कैमरे गायब

नागौर, राजस्थान। जिले की कृषि उपजमंडी, जो ए-ग्रेड श्रेणी में शामिल है और प्रतिदिन करोड़ों रुपए के कारोबार का केंद्र है, सुरक्षा व्यवस्था के मामले में गंभीर रूप से फेल पाई गई है। मुख्य गेट, यार्ड, गोदाम एवं दुकानों की निगरानी के लिए अभी तक मंडी परिसर में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। हालांकि सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात हैं, लेकिन कैमरों के अभाव में चोरी और अन्य अप्रिय घटनाओं को रोकना बड़ी चुनौती बन गया है।
मंडी प्रशासन का कहना है कि पूरे परिसर की सुरक्षा की स्क्रीनिंग करवाई गई है और 40 सीसीटीवी कैमरों की स्थापना हेतु प्रस्ताव कृषि विपणन बोर्ड को भेजा गया है। लेकिन, अब तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। इस देरी का सीधा फायदा उठाते हुए शातिर तत्वों ने कई मौकों पर मंडी में रखी फसलों की बोरियों को चोरी करने की घटनाएं अंजाम दी हैं। सुरक्षा की कमी को देखते हुए कई आढ़तियों ने अपने खर्चे पर दुकानों में निजी सीसीटीवी कैमरे लगवाने शुरू कर दिए हैं।
कृषि विपणन बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर विचार किया है और अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव अनुमोदित हो जाता, तो मुख्य गेट एवं मंडी के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों में कैमरे पहले ही स्थापित हो चुके होते। फिलहाल मंडी प्रशासन पुनः व्यापारियों से संवाद स्थापित कर शीघ्र इसे मंजूर कराने की कोशिश कर रहा है।
ए-ग्रेड मंडी के रूप में नागौर की यह मंडी उच्चतम सुरक्षा मानकों के अंतर्गत आनी चाहिए। सभी ब्लॉकों, मुख्य गेट के अंदर और बाहर दोनों ओर सीसीटीवी कैमरों का बहुप्रतिष्ठित संख्यात्मक वितरण किया जाना आवश्यक है ताकि आवक-जावक और मंडी में होने वाली सभी गतिविधियों की सटीक निगरानी संभव हो सके। इसके लिए अलग से एक कंट्रोल रूम बनाकर वहाँ एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था भी करनी चाहिए। यह व्यवस्था व्यापार और सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से आवश्यक है, जिससे किसानों और व्यापारी समुदाय को अतिरिक्त सुरक्षा मिले।
मंडी में लगाये गए कैमरों से न सिर्फ चोरों और शातिरों पर नकेल कसी जा सकेगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना या असामान्य गतिविधि की त्वरित पहचान भी हो सकेगी। वर्तमान परिस्थिति में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को शीघ्र कार्यवाही करनी होगी ताकि मंडी की प्रतिष्ठा और व्यापारी व किसानों का भरोसा बना रहे।



