विदेशी संकट से चमकी सरसों: समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिले किसानों को

सीकर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाद्य तेलों की आपूर्ति संकट की स्थिति पैदा हो गई है। इस परिस्थिति का प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र के सरसों उत्पादक किसानों को मिल रहा है। मंडियों में सरसों के दाम तेजी से बढ़कर समर्थन मूल्य से कहीं ऊपर सात हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुँच गए हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर राहत की लहर दौड़ गई है।
सरसों के भाव में आई इस अभूतपूर्व तेजी ने न केवल किसानों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि सरकारी खरीद एजेंसी की भी चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में हुई इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के कारण किसानों का मुख्य रुझान अब समर्थन मूल्य पर बिक्री करने से हटकर बाजार भाव पर बेचने की ओर हो गया है। किसानों का कहना है कि वर्षों बाद उन्हें समर्थन मूल्य से अधिक लाभ मिला है जिससे आर्थिक तौर पर संबल मिला है।
सरकार की ओर से जिले में 1 अप्रैल से सरसों की खरीद 6,200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से शुरू की जाएगी वहीं चना को लेकर भी किसानों के बीच अच्छा खरीदी भाव मिलने की उम्मीद है। चना की समर्थन मूल्य 5,875 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है, और इसमें भी तेजी देखने को मिल रही है।
शेखावाटी क्षेत्र के किसान लंबे समय से राहत के इंतजार में थे, और इस विस्तार वाले समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय तनाव खाद्य तेलों की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में सरसों के दामों में असामान्य तेजी आई है।
सरकारी एजेंसियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसानों को लाभ तो मिले लेकिन साथ ही बाजार में अनियंत्रित बढ़ोतरी को भी रोका जा सके। कुल मिलाकर, वर्तमान संकट ने प्रदेश के किसानों के लिए एक आशाजनक अवसर प्रस्तुत किया है, जो लंबे समय से किसानों के लिए आर्थिक चुनौतियां पैदा कर रहा था।




