ग्रामीण सेवा शिविर में शुद्ध नाम और आवासीय पटटा मिलने से चिंता हुई दूर
ब्यूरो चीफ प्रिया गौतम

टोंक । मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीण सेवा शिविर 2026 के फोलोअप कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से एक ही छत के नीचे सभी विभागों से जुड़े कार्यों का निस्तारण हो रहा है और मौके पर ही त्वरित समाधान किया जा रहा है। जिससे ग्रामीणों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। पात्र नागरिकों को मौके पर ही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का अनुदान व लाभ प्रदान कर राहत दी जा रही है।
शेडूलाल को मिला मकान का मालिकाना हक:-
ग्राम दाखिया के रहने वाले शेडूलाल गुर्जर एक सीधे-साधे और मेहनती किसान हैं। उनके पिता मोतीलाल गुर्जर ने उन्हें विरासत में एक पुश्तैनी मकान दिया था, जिसमें शेडूलाल का पूरा परिवार सालों से रह रहा था। मकान तो उनका अपना था, लेकिन कानूनी तौर पर उनके पास उस घर के मालिकाना हक का कोई पक्का कागज या पट्टा नहीं था। उनके गांव में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन हुआ। शेडूलाल को जैसे ही इस शिविर के बारे में पता चला, वे तुरंत अपने मकान के पट्टे के लिए आवेदन करने वहां पहुँच गए। पंचायत के अधिकारियों ने उनके आवेदन को गंभीरता से लिया। त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत की टीम ने शेडूलाल के मकान का मौका निरीक्षण किया। सभी जरूरी जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, शिविर में ही आधिकारिक तौर पर शेडूलाल को उनके पुश्तैनी मकान का पट्टा और स्वामित्व कार्ड सौंप दिया गया। सालों पुराना सपना सच होते देख शेडूलाल की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। पट्टा और स्वामित्व कार्ड हाथ में लेते ही वे अति प्रसन्न हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को दिल से धन्यवाद दिया।
नाम हुआ शुद्ध कंधनाथ दास बना रघुनाथ दास:-
उपखंड टोंक के गांव दाखिया के रहने वाले रघुनाथ दास एक सीधे-साधे किसान थे। उनके पिता का नाम प्रभुदास था। रघुनाथ के पास गाँव में अपनी एक पुश्तैनी ज़मीन थी, लेकिन पिछले कुछ समय से रघुनाथ एक बड़ी उलझन में थे। राजस्व रिकॉर्ड में एक लिपिकीय गलती के कारण उनके नाम रघुनाथ दास की जगह गलती से कंधनाथ दास दर्ज हो गया था। इस एक छोटी सी अशुद्धि के कारण उन्हें अपनी ही ज़मीन से जुड़े सरकारी कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। वह इस नाम को सुधरवाने के लिए परेशान थे। रघुनाथ अपनी ज़मीन के कागज़ात लेकर शिविर में पहुँचे। उन्होंने वहाँ मौजूद शिविर प्रभारी के सामने अपनी समस्या रखी और नाम शुद्धिकरण के लिए एक प्रार्थना पत्र पेश किया। शिविर प्रभारी ने मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। मौके पर ही पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षक को बुलाया गया। अधिकारियों ने तुरंत रघुनाथ के प्रार्थना पत्र और रिकॉर्ड की जाँच की और मौके पर ही रिपोर्ट तैयार की। राजस्व रिकॉर्ड में कंधनाथ की जगह सही नाम रघुनाथ दास दर्ज कर दिया गया। सालों से लटका हुआ काम महज कुछ ही घंटों में पूरा हो गया। अपनी आँखों के सामने नाम सुधरता देख रघुनाथ दास की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने मुस्कुराते हुए राज्य सरकार को धन्यवाद दिया।




