जयपुर

अमित शाह ने विपक्ष पर लगाया महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ उत्तर-दक्षिण विभाजन फैलाने का आरोप

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संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और परिसीमन आयोग से जुड़े बिलों पर मताधिकार से पहले गंभीर बहस जारी रही। सरकार और विपक्ष के बीच इस मसले पर तीखी नोकझोंक देखी गई जिससे संसद की कार्यवाही को व्यापक ध्यान मिला।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष विभिन्न राज्यों में महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ है और वे उत्तर-दक्षिण के बीच एक नकारात्मक नैरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण और समानता के लिए यह आरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय लोकतंत्र के आदर्शों के अनुरूप है और देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती देगा।

लोकसभा में पिछले दिनों महिला आरक्षण बिल में संशोधन पर चर्चा शुरू हुई, जिसका उद्देश्य संसद और स्थानीय निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है। इस पर विभिन्न पार्टियों के सांसदों ने अपनी राय रखी, जहां कुछ ने बिल का समर्थन किया तो कुछ ने प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई। खासकर दक्षिणी राज्यों के कुछ नेताओं ने इस बिल के प्रभाव और लागू करने की प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की।

परिसीमन आयोग से जुड़े बिल पर भी मत-विभाजन साफ नजर आया, क्योंकि इससे राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनः निर्धारण होगा, जिसका सीधा असर राजनीतिक समीकरणों पर होता है। विपक्ष का तर्क रहा कि यह बिल केंद्र की राजनीतिक हित साधने वाली रणनीति हो सकती है, वहीं सरकार ने इसे आवश्यक सुधार बताया ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता आए।

सरकार ने जोर दिया कि महिला आरक्षण बिल संसद में महिला सहभागिता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम है जो पिछले वर्षों में भी संवाद और सुधार का विषय रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन आयोग के संशोधन को क्षेत्रीय विकास और जनसांख्यिकीय बदलावों को ध्यान में रखकर किया गया कदम बताया।

विपक्ष के कुछ सांसदों ने कहा कि बिलों पर तुरंत मतदान करने के बजाय व्यापक जनता की सहमति और राज्य सरकारों की राय ली जानी चाहिए ताकि विवाद कम हो। उनका कहना था कि इस तरह के संवेदनशील कानूनों को जल्दबाजी में पास करना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।

संसद द्वारा इन बिलों पर आगे की चर्चा और मतदान कल होना है, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि संसद में इन विधेयकों के समर्थन और विरोध के बीच संतुलन कैसे है। संसद के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे देश की राजनीतिक दिशा निर्धारित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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