राजस्थान में अब बांस की खेती होगी खेतों में, 12 जिलों में शुरू होगी योजना

प्रतापगढ़। राजस्थान के उद्यान विभाग ने राष्ट्रीय बांस मिशन को पुनः सक्रिय कर राज्य में बांस की खेती को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि करना है बल्कि कृषि वानिकी को भी मजबूत बनाना है। इसके तहत 12 जिलों में बांस की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत किसानों को बांस की खेती के फायदे, तकनीक और वितरण प्रणाली के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है। हाल ही में उद्यान विभाग की टीम ने किसानों का भ्रमण भी कराया, ताकि वे बांस की खेती के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान और संसाधनों के बारे में जान सकें।
राजस्थान में अब तक बांस की खेती को प्राथमिकता नहीं दी गई थी और यह प्रायः जंगलों में ही पाया जाता था। परंतु इस योजना के तहत अब बांस की खेती खेतों में की जाएगी, जिससे खेती योग्य भूमि का भी बेहतर उपयोग संभव होगा। इससे न केवल किसानों को आय के नए स्रोत मिलेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी क्योंकि बांस चमकदार पेड़ों की तरह कार्बन सिंक का कार्य करता है।
उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांस की खेती से जुड़ी कई रोजगार की संभावनाएं भी खुलेंगी। कृषि उत्पादों के साथ-साथ बांस के कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प और निर्माण क्षेत्र में भी वृद्धि होगी। वे बताते हैं कि इस योजना के तहत किसानों को बांस की खेती के लिए पौधे, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान की जाएगी।
राज्य सरकार ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न जागरूकता अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया है। इससे किसान बांस की खेती को लेकर आश्वस्त और उत्साहित हैं।
राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत राजस्थान में बांस की खेती को बढ़ावा देना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कृषि विकास और रोजगार सृजन के लिए सहायक सिद्ध होगा। यह राज्य की समृद्धि में योगदान के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा में भी सहायक होगा।



