प्रतापगढ़: अफीम परख प्रक्रिया में काश्तकारों को बड़ी राहत, अब तौल तीन श्रेणियों में वर्गीकृत

प्रतापगढ़। इंदिरा कॉलोनी में स्थित अफीम तौल केंद्र पर पिछले आठ दिनों से अफीम तौल प्रक्रिया निरंतर जारी है। जिले भर के काश्तकार निर्धारित तिथियों के अनुसार यहां अपनी उपज का तौल करवा रहे हैं। इस दौरान नारकोटिक्स विभाग ने अफीम परख प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे काश्तकारों को बड़ी राहत मिली है।
शनिवार से लागू किए गए नए नियमों के तहत अब अफीम का तौल तीन श्रेणियों में किया जाएगा। पहले जहाँ तौल प्रक्रिया एक समान होती थी, वहीं अब इस वर्गीकरण से काश्तकारों के उत्पादन की गुणवत्ता के अनुसार उचित माप और भुगतान सुनिश्चित होगा। इस पहल से न केवल परख की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि काश्तकारों को भी बेहतर मुनाफा होने की उम्मीद है।
प्रतापगढ़ के अफीम काश्तकारों ने इस परिवर्तन की खूब सराहना की है। उन्होंने कहा कि इससे उनके उत्पादन का सही मूल्यांकन संभव होगा और वे बिना किसी अनिश्चितता के अपनी उपज बेच सकेंगे। स्थानीय अफीम तौल केंद्र पर तौल कार्य में लगी टीम भी कहती है कि एक ही प्रक्रिया में तीन श्रेणी बांटने से कार्य की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों के तहत अफीम का तौल करने से गुणवत्ता के अनुसार भुगतान किया जाएगा, जिससे काश्तकारों के हक की रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव काश्तकारों की भलाई और जिले में अफीम उत्पादन की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए समय सापेक्ष था।
जिले में अफीम उगाने वाले किसानों के लिए यह खबर उत्साहवर्धक है, क्योंकि यह प्रक्रिया उनके आर्थिक हितों को संरक्षण प्रदान करती है। अफीम तौल केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है ताकि तौल प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारू रूप से पूरी हो सके।
प्रतापगढ़ में अफीम की उपज परख और तौल प्रक्रिया को लेकर यह बदलाव सरकार की किसानों के प्रति सहानुभूति और उन पर भरोसे की निशानी है। आने वाले दिनों में इस नई प्रक्रिया से काश्तकारों को अधिकतम लाभ होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे जिले की अफीम खेती को नई दिशा मिलेगी।




