उदयपुर

कागजों में सुविधाओं का विस्तार, धरातल पर खस्ता हाल रोडवेज बसों का

झाड़ोल (उदयपुर) से रिपोर्ट: राजस्थान सरकार प्रदेश के दूर-दराज इलाकों को रोडवेज बस सेवाओं के माध्यम से जोड़ने के दावे तो बड़े-बड़े कर रही है, लेकिन झाड़ोल विधानसभा क्षेत्र में स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। यहां के ग्रामीण और राहगीर पिछले कई सालों से बस सेवा की खराब स्थिति से जूझ रहे हैं।

पहले इस मार्ग पर 15 से अधिक बसें चलती थीं, जिनसे लगभग 10 गांव की जनसंख्या लाभान्वित होती थी। लेकिन अब मात्र पांच अत्यंत जर्जर बसें ही संचालन में हैं, जो जरूरत से कहीं कम हैं। इन बसों की खराब स्थिति ऐसी है कि कई बार यात्रियों को बीच रास्ते में बस छोड़नी पड़ती है। उदयपुर से पानरवा (वाया गोगुन्दा, ओगणा, बिरोठी) रूट की बसें दो साल से बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को झाड़ोल मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कई बार वाहन बदलना पड़ता है। यह न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि व ग्रामीण इस समस्या को लेकर काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि परिवहन विभाग की उदासीनता और अव्यवस्था ने जनजाति क्षेत्र के विकास के सारे दावे खोखले साबित कर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार न हुआ तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

हाल ही में उदयपुर से अम्बाजी (वाया झाड़ोल) मार्ग पर चलने वाली एक रोडवेज बस तीन दिनों से रास्ते में खराब खड़ी है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यात्री और ग्रामीण आरोप लगाते हैं कि उदयपुर डिपो में बसों के रखरखाव के लिए उचित व्यवस्था नहीं है और जर्जर बसों को जबरन रूट पर भेजा जाता है, जो यात्रा की सुरक्षा और समयसीमा दोनों के लिए खतरा है। विभागीय अधिकारियों की ओर से शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है, जिससे लोगों में नाराजगी व्याप्त है।

जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने इस मुद्दे पर कहा है कि वे रोडवेज बसों के संचालन को लेकर तत्काल संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। क्षेत्र के लिए दो नई बसें शुरू करने का प्रस्ताव है, जिनमें से एक देवला-कोटड़ा मार्ग पर और एक झाड़ोल मार्ग पर चलेगी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि झाड़ोल विधानसभा क्षेत्र की रोडवेज सेवा की समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जाएगा।

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि संचार व परिवहन की सुविधा के अभाव में ग्रामीण जनता कितना प्रभावित हो रही है। सरकार के दावे और हकीकत में इस अंतर को कम करना अब वक्त की प्राथमिक आवश्यकता बन गई है, ताकि जनजाति क्षेत्र के विकास की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

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