राजस्थान: वीबी जी-राम-जी योजना में ‘घोस्ट लेबर’ घोटाला! होटल के वेटर को दिखाया लेबर, ऐप से फर्जीवाड़ा

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामले फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन – ग्रामीण (VB-G RAM G) योजना में घोस्ट लेबर का मामला सामने आया है, जिसने सरकार के डिजिटल हाजिरी और यूनिक आईडी से फर्जीवाड़ा खत्म करने के दावों को चुनौती दी है।
राज्य की बेगूं तहसील की पारसोली पंचायत में एक हैरान कर देने वाला खेल चल रहा है। यहां एक श्रमिक जो वास्तविकता में उदयपुर के एक लग्जरी होटल में वेटर की नौकरी कर रहा है, पर चित्तौड़गढ़ के सरकारी रोजगार रिकॉर्ड में उसे तगारी उठाते हुए दिखाया गया है। इस फर्जीवाड़े से यह स्पष्ट होता है कि योजना में काम कर रहे कर्मचारियों और सरकारी सिस्टम में गड़बड़ी है।
सरकार का दावा था कि डिजिटल हाजिरी के जरिए योजना के तहत किए जाने वाले काम की सटीक निगरानी होगी, जिससे फर्जीवाड़ा रोकना आसान होगा। लेकिन जांच में पाया गया कि पारसोली पंचायत के कई श्रमिक वास्तविकता से दूर काम के रिकॉर्ड दिखा रहे हैं। इस तरह के घोटाले से न केवल योजना की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है, बल्कि इन संसाधनों का दुरुपयोग करके गरीब और जरूरतमंदों को भी हानि पहुंचाई जा रही है।
स्थानीय लोगों और पंचायत प्रशासन की मिलीभगत का अंदेशा भी व्यक्त किया जा रहा है। इस घोटाले से संबंधित अधिकारियों ने जल्द जांच कराने का आश्वासन दिया है। वहीं राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़े कदम उठाने की बात कही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक तकनीकी सिस्टम के साथ पारदर्शिता और कड़ी निगरानी के उपाय नहीं किए जाएंगे, तब तक ऐसे घोटाले जारी रहेंगे। योजना के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि डिजिटल हाजिरी के जरिये वास्तविक मजदूरों की पहचान और काम के वाजिब प्रमाण उपलब्ध हों।
यह मामला राजस्थान के ग्रामीण रोजगार योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बड़ी चुनौती पेश करता है। नागरिकों की सुरक्षा, योजना की सफलता और सरकारी संसाधनों के सही उपयोग के लिए इस संकट की प्रभावशाली जांच और सुधार की तत्काल आवश्यकता है।




