बीकानेर

पीबीएम का हाल: स्ट्रेचर पर तय होती मरीजों की मंजिलें

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल का अस्थि रोग विभाग अव्यवस्थाओं की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां फैक्चर जैसे गंभीर मरीजों को भी राहत के बजाय भटकाव झेलना पड़ रहा है। भर्ती एक भवन में, ऑपरेशन दूसरे में और जांचों के लिए अलग-अलग स्थानों पर दौड़भाग। इस बिखरी व्यवस्था ने मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों को भी परेशानी में डाल दिया है। हालात यह हैं कि स्ट्रेचर पर मरीजों को लंबी दूरी तय कर ट्रॉमा सेंटर तक ले जाना पड़ रहा है। फैक्चर पीडि़त मरीजों को भी नहीं मिल रही राहत आमतौर पर फैक्चर मरीजों को कम हिलाने-डुलाने की सलाह दी जाती है, लेकिन यहां मरीजों और उनके तीमारदारों को बार-बार इधर-उधर जाना पड़ता है। जांचों के लिए अलग भटकाव और भर्ती की अलग प्रक्रिया से एक दिन सिर्फ व्यवस्थाओं में ही निकल जाता है।Input: संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल का अस्थि रोग विभाग अव्यवस्थाओं की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां फैक्चर जैसे गंभीर मरीजों को भी राहत के बजाय भटकाव झेलना पड़ रहा है। भर्ती एक भवन में, ऑपरेशन दूसरे में और जांचों के लिए अलग-अलग स्थानों पर दौड़भाग। इस बिखरी व्यवस्था ने मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों को भी परेशानी में डाल दिया है। हालात यह हैं कि स्ट्रेचर पर मरीजों को लंबी दूरी तय कर ट्रॉमा सेंटर तक ले जाना पड़ रहा है। फैक्चर पीडि़त मरीजों को भी नहीं मिल रही राहत आमतौर पर फैक्चर मरीजों को कम हिलाने-डुलाने की सलाह दी जाती है, लेकिन यहां मरीजों और उनके तीमारदारों को बार-बार इधर-उधर जाना पड़ता है। जांचों के लिए अलग भटकाव और भर्ती की अलग प्रक्रिया से एक दिन सिर्फ व्यवस्थाओं में ही निकल जाता है। [/gआधार पर एक पूरी तरह से मानव द्वारा लिखी गई जैसी प्रोफेशनल न्यूज़ रिपोर्ट तैयार करें। निर्देश:
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