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भरतपुर के किसानों ने फसल नुकसान पर मुआवजे की मांग की

भरतपुर, राजस्थान – भरतपुर जिले के किसानों ने इस बार अपने खेतों में भारी नुकसान की शिकायत की है। जिले के कई इलाकों में गेहूं, सरसों और चने की फसलें अत्यधिक प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी है। वर्षा की अनियमितता और कीटों के प्रकोप के कारण फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आई है।

किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की अनिश्चितता और बीज तथा खाद की कमी ने उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। सरसों और चने की फसलें खासतौर पर प्रभावित हुई हैं, जिनकी कटाई के ठीक पहले अचानक आई भारी बारिश और सूखे के कारण खेती बर्बाद हो गई। गेहूं की फसल में भी कीटों के संक्रमण के कारण बीमारी फैली है, जिससे मार्केट में माल कम पहुंच रहा है।

भरतपुर के एक वरिष्ठ किसान, राम पाल सिंह ने बताया, “हमने पूरे साल कड़ी मेहनत की, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदाओं और कीटों ने हमारी फसलें पूरी तरह से तबाह कर दीं। हम सरकार से अपील करते हैं कि हमें उचित मुआवजा और कृषि सहायता प्रदान की जाए, ताकि हम अपने परिवारों का पेट पाल सकें।”

जिले के कृषि विभाग ने भी नुकसान की जानकारी ली है और वहां के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि मुआवजे के लिए जल्द ही भूमि निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और किसानों को राहत योजना का लाभ दिया जाएगा। साथ ही, किसानों को फसल सुरक्षा के लिए नवीनतम तकनीकी उपाय सुझाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

स्थानीय किसान संगठनों ने भी सरकार से इस समस्या के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और त्वरित कार्यवाही करने की मांग की है। किसान नेताओं ने कहा कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली तो किसानों की आय और जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जो सामाजिक और आर्थिक संकट भी उत्पन्न कर सकता है।

भरतपुर में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण फसल नुकसान का प्रभाव पूरे क्षेत्र के विकास पर पड़ता है। इसलिए सरकार और संबंधित विभागों द्वारा किसानों के हितों की रक्षा करना बेहद आवश्यक है। इस मसले पर लगातार चर्चा और कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हालात सुधर सकें और किसानों का विश्वास बना रहे।

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