झुंझुनू

झुंझुनूं : बाजार छोड़ने का बहाना बना कर लड़की को बाइक पर बिठा कर खेत में ले जाकर दुष्कर्म की घटना, कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा

झुंझुनूं, राजस्थान। विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो) झुंझुनूं इसरार खोखर ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने दोषी को 20 वर्षों के कठोर कारावास और 50,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा विभिन्न धाराओं के तहत कुल 1,45,000 रुपये के अर्थदंड का निर्णय भी दिया गया है।

यह मामला कई महीनों से सुर्खियों में था जब पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उसे बाजार छोड़ने के बहाने बाइक पर बिठाकर खेत की ओर ले गया था। वहां आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई शुरू की। पुलिस जांच में भी आरोपी की संलिप्तता पूरी तरह से साबित हुई।

न्यायाधीश इसरार खोखर ने सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को बयान करते हुए कहा कि नाबालिग के साथ इस तरह का अपराध समाज के लिए कड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किये जाएंगे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी ताकि अन्य वंचितों को न्याय मिले।

पॉक्सो अदालत में प्रस्तुत सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे कानून के अनुसार कठोरतम दंड दिया गया है। अदालत के फैसले को सुनते ही पीड़िता और उसके परिवार में न्याय मिलने की भावना ने खुशी की लहर दौड़ा दी।

प्रशासन ने भी कहा है कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे तथा ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित सुनवाई को अनिवार्य किया जाएगा। पुलिस ने भी सतर्कता बढ़ाते हुए यौन अपराधों के खिलाफ जागरूकता अभियानों को तेज करने का निर्णय लिया है।

इस घटना ने एक बार फिर समाज में बाल सुरक्षा और महिला सुरक्षा के मुद्दे को उभारा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें ताकि न्याय हो सके और दोषियों को मुक्ति न मिली।

इस मामले में अदालत का फैसला कई अन्य केसों के लिए मिसाल बनेगा और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे यौन अपराधियों में डर पैदा होगा तथा पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया और तेज होगी। झुंझुनूं के लोग इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए ऐसी घटनाओं पर कटाक्ष कर रहे हैं।

अंततः यह घटना और उससे जुड़ा मामला स्पष्ट करता है कि कानून सख्त है और न्याय प्रणाली हर मामले में निष्पक्ष एवं संजीदगी से काम करती है। विशेषकर बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में न्यायाधीशों की सहानुभूति और संवेदनशीलता दिखना समाज के लिए राहत की बात है।

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