बूंदी: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में मंडी में प्रदर्शन किया

कापरेन, बूंदी:
स्थानीय कृषि उपज मंडी में भाजपा सरकार के नीति निर्धारण के खिलाफ किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट हो गए हैं। एफसीआई के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद केंद्र तथा राजफैड द्वारा संचालित चना, सरसों के खरीद केंद्र की अव्यवस्थाओं और तुलाई प्रक्रिया में किसानों को आ रही कठिनाइयों को लेकर रविवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और प्रशासनिक अधिकारियों से समाधान की मांग की।
कृषि मंडी में किसानों को न केवल तुलाई के दैरान समस्याएं आ रही हैं, बल्कि खरीद प्रक्रिया में भी देरी के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई किसानों को उनके अनाज का मूल्य उचित समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मंडी में मौजूद किसानों का कहना है कि समय से समर्थन मूल्य न मिलने से उनका कृषि उत्पादन उद्योग संकट में है।
प्रदर्शनकारियों ने उप तहसील कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि एफसीआई और राजफैड के खरीद केंद्रों पर व्यवस्था सुधारी जाए, किसानों को तुलाई और खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा समर्थन मूल्य समय पर और सही मूल्य प्रदान किया जाए। ज्ञापन में किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
कांग्रेस के जिला पदाधिकारी ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए पार्टी हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार से निरंतर संवाद के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान निकालना आवश्यक है, ताकि कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और किसानों का भला हो।
स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जल्द से जल्द किसान केंद्रों में हो रहे विलंब और अव्यवस्थाओं को दूर करें। कृषि उपज मंडी में सुधार के लिए उच्च स्तरीय जांच भी प्रस्तावित की गई है।
किसान संगठनों का मानना है कि यदि तुलाई और खरीद प्रक्रिया में सुधार नहीं होता है, तो आगामी समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे किसानों के मनोबल पर असर पड़ेगा और कृषि क्षेत्र की आर्थिक दशा और बिगड़ेगी। इसलिए प्रशासन और सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वे किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और आवश्यक कदम उठाएं।
यह प्रदर्शन बूंदी जिले के कृषि क्षेत्र की लगातार बढ़ती चुनौतियों को उजागर करता है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि उनके साथ की गई इस पहल के बाद बेहतर प्रबंधन और सुविधाएं उनके गांवों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें समय पर उचित मूल्य के साथ अपनी फसल बिक्री करने में मदद मिलेगी।




