भीलवाड़ा

महात्मा गांधी स्कूल में खाली सीटों पर अब पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा प्रवेश

ग्वालियर, मध्य प्रदेश। प्रदेश के महात्मा गांधी राजकीय (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने का इच्छुक अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण नई सूचना सामने आई है। जिन विद्यार्थियों का चयन लॉटरी प्रणाली में नहीं हो पाया या जिन्होंने आवेदन करने में समय चूक किया था, उन्हें अब शिक्षा विभाग ने एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक, श्री सीताराम जाट ने स्कूलों में खाली सीटों पर ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर सीधे प्रवेश देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इस नए निर्देश के तहत, जिन विद्यालयों में लॉटरी प्रक्रिया के बाद भी सीटें खाली रह जाएंगी, वहां प्रवेश प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। यह व्यवस्था अभिभावकों के लिए राहत का कारण बनी है, क्योंकि अब वे बिना लंबी प्रक्रिया के अपने बच्चों का नामांकन करवा सकेंगे।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी संबंधित जिला अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे इस प्रक्रिया को ठीक प्रकार से पालन करें। साथ ही, उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द विद्यालय पहुंचकर अपने बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर लें ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारी सुचारू रूप से हो सके।

मध्य प्रदेश के स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से छात्र चयन किया जाता है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया निष्पक्ष और समावेशी बनी रहे।

यह नई व्यवस्था उन परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभदायक होगी जो लॉटरी में चयन से वंचित रह गए या अंतिम समय में आवेदन नहीं कर पाए थे। शिक्षा विभाग ने यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया है कि सभी इच्छुक बच्चे शिक्षा के अवसर से वंचित न रहें।

अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग का आभार प्रकट किया कि उन्होंने इस दिशा में त्वरित और सकारात्मक कदम उठाए हैं।

शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में फैले महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ावा देगी, साथ ही प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगी।

अंततः यह फैसला प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान करेगा और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा।

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