राजस्थान: 22 वर्ष की उम्र में शहीद हुआ शेखावटी का लाल, 55 साल बाद बांग्लादेश ने दिया मेडल और सम्मान

झुंझुनूं, राजस्थान। राजस्थान की वीरभूमि झुंझुनूं जिले के धींधवा गांव के शहीद धर्मपाल डूडी को 55 साल बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले इस वीर जवान को बांग्लादेश सरकार ने विशेष प्रशस्ति पत्र और राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न देकर गौरवान्वित किया है। यह सम्मान भारतीय सेना के अधिकारियों द्वारा उनके पैतृक गांव पहुंचाकर परिवार को सौंपा गया, जिससे गांव में भारी भावुकता का माहौल बन गया।
धर्मपाल डूडी ने 22 वर्ष की अवस्था में शहादत देकर अपने गांव, जिले और देश के लिए एक उदाहरण स्थापित किया था। 1971 के युद्ध के दौरान उनका अदम्य साहस, उनकी बहादुरी और उनका समर्पण देश के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उनके परिजनों ने बताया कि लंबे समय तक उनके बलिदान को वास्तविक सम्मान नहीं मिल पाया था, लेकिन अब बांग्लादेश द्वारा दिया गया यह सम्मान उनकी वीरता को हमेशा के लिए यादगार बना देगा।
भारतीय सेना के अधिकारियों ने समारोह के दौरान कहा कि ऐसे जवान देश की असली ताकत हैं। उन्होंने धर्मपाल डूडी की आत्मा को सलाम किया और कहा कि उनके जज़्बे से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। झुंझुनूं के धींधवा गांव में मौजूद ग्रामीण, युवा और बुजुर्ग सबने मिलकर शहीद को श्रध्दांजलि दी और ‘शहीद धर्मपाल अमर रहें’ के नारे लगाए।
धर्मपाल के परिवारवालों ने कहा कि यह सम्मान उन्हें और उनके परिवार को गर्व की अनुभूति कराता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे धर्मपाल के आदर्शों पर चलते हुए देश की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे। गाँवे की पंचायत ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और कहा कि शहीद धर्मपाल की स्मृति में एक स्मारक बनवाया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनकी कहानी पता चले।
1971 के युद्ध में भारत और पाकिस्तान के बीच चले संघर्ष में झुंझुनूं के जवानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। धर्मपाल डूडी जैसे शूरवीरों ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान का बलिदान दिया, जिसने दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक नक्से में बदलाव लाने में मदद की। इस सम्मान से यह सुनिश्चित होता है कि उनकी वीर गाथाएं भुलाई नहीं जाएंगी और हमेशा याद रखी जाएंगी।
इस मौके पर जिला प्रशासन ने भी शहीद के परिवार को सम्मानित करते हुए आर्थिक सहायता की घोषणा की। साथ ही सुरक्षा बलों ने जोर देकर कहा कि ऐसे वीर जवानों की शौर्य गाथा पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत है।




