राजसमंद

चुंदड़ी गणगौर की सवारी से गूंज उठा राजसमंद, भक्ति और रंगों से सराबोर हुआ शहर

राजसमंद, राजस्थान। राजसमंद में नगर परिषद के तत्वावधान में आयोजित गणगौर महोत्सव के तीसरे दिन आज “चुंदड़ीगणगौर” की भव्य सवारी ने पूरे शहर को उत्सव के रंगों से रंग दिया। सुबह से ही शहर की गलियाँ भक्ति और उल्लास से गूंज रही थीं। इस अवसर पर पारंपरिक सजी-धजी सवारी ने लोगों के मन में उत्साह और श्रद्धा का संचार किया।

पुष्टि मार्ग की तृतीय पीठ से प्रभु श्री द्वारकाधीश मंदिर के सामने से सवारी की शुरुआत हुई, जहाँ ईसरजी और गणगौर माता को आकर्षक चुंदड़ी वस्त्रों में सजाया गया था। सवारी में प्रभु द्वारकाधीश की छवि भी बेहद मनमोहक एवं भव्य रूप में सजी थी, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। सवारी के दौरान स्थानीय कलाकारों और भक्तों ने भजनों एवं लोकगीतों के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को प्रगाढ़ किया।

गणगौर महोत्सव के तहत निकाली गई इस सवारी में नगर के विभिन्न मोहल्लों से बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया, जिन्होंने पारंपरिक परिधानों से सजी महिफल को और भी भव्य बनाया। नगर परिषद के अध्यक्ष सहित कई प्रशासनिक अधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे और उन्होंने महोत्सव के आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।

राजसमंद की सांस्कृतिक विरासत में गणगौर महोत्सव का विशेष स्थान है। यह त्यौहार स्थानीय लोगों के लिए श्रद्धा तथा सामाजिक मेलजोल का प्रतीक है। इस दौरान शहर के बाजार, गलियों और मुख्य स्थानों पर खूब रंग-बिरंगी सजावट दिखाई दी। इस अवसर पर भक्ति गीत, ढोल-नगाड़ों की थाप और लोक नृत्य उत्साह को चार चांद लगा रहे थे।

शहरवासियों ने इस आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि चुंदड़ी गणगौर की सवारी ने पूरे राजसमंद को एकजुट किया और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी इस तरह के आयोजन धूमधाम से होते रहेंगे और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेंगे।

इस प्रकार राजसमंद ने आज एक बार फिर भक्ति, उमंग और सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय दिया। गणगौर महोत्सव की चमक-दमक से सजी यह सवारी शहर के जनजीवन में खुशियों का संदेश लेकर आई।

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