आज के दौर में कुलिशजी जैसे साहसी पत्रकारों की अत्यंत आवश्यकता

झालावाड़, राजस्थान। शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्म शती दिवस के अवसर पर झालावाड़ के स्काउट-गाइड कार्यालय में अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई के तत्वावधान में एक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में जिले के कई प्रबुद्धजनों ने कुलिश जी के व्यक्तित्व और उनके जीवन विचारों पर योगिता व्यक्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई, जोकि भारतीय परंपरा के अनुसार ज्ञान और विद्या की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। आयोजकों ने इस अवसर पर कुलिश जी की पत्रकारिता के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सलाम किया।
कर्पूर चन्द्र कुलिश ने न केवल राजस्थान पत्रिका की स्थापना की, बल्कि स्वतंत्रता के बाद के दौर में पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया। उनकी निर्भीकता और सत्य के प्रति अडिगता आज भी पत्रकारिता के छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। संगोष्ठी में वक्ताओं ने यह भी बताया कि किस प्रकार कुलिश जी ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर निर्भीक होकर अपनी आवाज उठाई, जिससे उनकी पत्रकारिता ने समाज में जागरूकता फैलाई।
इस अवसर पर पत्रकारिता के वर्तमान दौर में हरित पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया और चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित जनों ने निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के महत्व पर जोर दिया, खासतौर पर ऐसे समय में जब मीडिया पर कई प्रकार के दबाव और प्रभाव बढ़ रहे हैं।
संगोष्ठी में सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों, पत्रकारों और साहित्यकारों ने कुलिश जी के आदर्शों को याद करते हुए कहा कि आज के दौर में भी हमें उनके जैसे निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारों की आवश्यकता है जो समाज की सच्चाइयों को बेझिझक सामने ला सकें।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों ने कुलिश जी के योगदान को याद करते हुए उनकी जीवनी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किए, जो नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से परिचित कराने में सहायक होंगे। संगोष्ठी का समापन संयोजनकर्ताओं के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी ने पत्रकारिता के महत्व पर जोर दिया और व्यवस्था के मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई।
इस प्रकार, कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्म शती दिवस पर आयोजित यह संगोष्ठी न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नए जोश और निष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान भी थी।



