बीकानेर

नामांकन बढ़ाने के लिए गुरुजी पहुँचे घर-घर

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। एक अप्रेल से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र को देखते हुए राज्य के स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस अभियान के तहत शुक्रवार से हाउस होल्ड सर्वे एवं ड्रॉप आउट बच्चों के चिन्हिकरण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। शिक्षकों ने इस बार अपने कदम घर-घर तक बढ़ा दिए हैं ताकि हर बच्चे तक शिक्षा का अवसर पहुंचाया जा सके।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने अभिभावकों से मिलकर बच्चों के नामांकन के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। घर-घर जाकर वे सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान कर रहे हैं और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील कर रहे हैं। शिक्षक मानते हैं कि शिक्षा से वंचित कोई भी बच्चा नहीं रहना चाहिए, जिससे सरकारी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा निजी स्कूलों से बेहतर बनी रहे।

इस अभियान के तहत उन बच्चों की पहचान करना भी प्रमुख है जो किसी कारणवश लंबे समय से स्कूल छोड़ चुके हैं। शिक्षकों का कहना है कि इन्हें समाज व परिवार की सहायता से पुनः शिक्षा के मार्ग पर लाना जरूरी है। इसके लिए स्थानीय सरकारी अधिकारियों, ग्राम पंचायतों और पंचायत स्कूलों के प्रशासन के बीच समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है।

अभियान के दौरान अभिभावकों को विभिन्न सरकारी स्कीमों जैसे छात्रवृत्ति, मुफ्त किताबें, मुफ्त शिक्षा एवं भीषण गर्मी या ठंड से बचाव के लिए बनाए गए शैक्षिक संसाधनों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। शिक्षक उम्मीद जताते हैं कि इस पहल से भारी संख्या में ऐसे बच्चे भी शिक्षा से जुडेंगे जो पहले नामांकन से बाहर थे।

स्थानीय शिक्षा अधिकारी निरीक्षण के दौरान बोले कि बच्चों को स्कूलों से दूर करने वाली वजहों की जांच की जा रही है और हर संभव प्रयास किया जाएगा कि शिक्षा का विकास हो। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि सरकार की प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ सभी बच्चों को स्कूलों में लाना है।

इस पहल को लेकर अभिभावकों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई अभिभावकों ने बताया कि इस बार स्कूल के शिक्षक उनके घर आकर शिक्षा के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं, जिससे उनके बच्चे को पढ़ाई में मदद मिलेगी।

इस अभियान की सफलता राज्य के शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसका लक्ष्य मास शिक्षा को बढ़ावा देना और सभी बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना है और यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चा को भी शिक्षा से वंचित न रहना पड़े।

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