बारां राशन डीलर : ₹85 लाख की टीडीएस राशि फंसी, खाद्य निगम ने लिया कड़ा रुख, आज होगा अंतिम फैसला

बारां, राजस्थान। बारां जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन डीलरों को नियमित रूप से राशन वितरित किया जा रहा है, लेकिन इन डीलरों को उनकी कमीशन राशि का भुगतान नहीं हो पा रहा है। बड़ी समस्या यह है कि कमीशन राशि से जब टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (टीडीएस) काटा जा रहा है, तब भी टीडीएस की रकम डीलरों को वापस नहीं दी जा रही है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिले के कई राशन डीलर इस राशि की बकाया टीडीएस की राशि को लेकर खाद्य निगम के साथ गतिरोध में हैं। डीलरों का कहना है कि उनकी आर्थिक एवं व्यावसायिक स्थिति पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है और वे लगातार खाद्य विभाग एवं निगम प्रशासन से समुचित भुगतान की मांग कर रहे हैं।
खाद्य निगम प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि ₹85 लाख के लगभग टीडीएस राशि फंसी हुई है और इस पर निगम ने सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। आज इस मामले पर अंतिम निर्णय की संभावना जताई जा रही है। निगम के अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और डीलरों को उनका उचित हक मिले।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सुचारू कार्यप्रणाली के लिए राशन डीलरों का भुगतान समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। पिछले कई महीनों से डीलरों को कमीशन के भुगतान में देरी की समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें मिली हैं, और यह टीडीएस राशि का फंसा होना स्थिति को और गंभीर बनाता है।
स्थानीय डीलर संघ के अध्यक्ष ने बताया कि वे खाद्य निगम के साथ इस मुद्दे को लेकर लगातार संवाद कर रहे हैं और विश्वास व्यक्त किया कि जल्द ही विवाद सुलझ जाएगा। उन्होंने सरकार से भी अपील की कि जल्द से जल्द डीलरों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं ताकि राशन वितरण प्रणाली प्रभावित न हो।
इस मामले में खाद्य निगम के अधिकारियों ने दावा किया है कि वे जल्द से जल्द भुगतान प्रक्रिया को दुरुस्त करेंगे और डीलरों के फंसे हुए款ों को जारी करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी ऐसे कई मामलों को निगम ने समय रहते हल किया है और इस बार भी इसी रवैये पर काम चल रहा है।
बारां जिले के राशन डीलर इस बीच जागरूक बने हुए हैं और अपनी कानूनी एवं प्रशासनिक मदद भी लेने की तैयारी कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से निपटा जा सके। अधिकारियों की माने तो आगामी फाइनल फैसले से इस विवाद का समाधान निकलने की पूरी संभावना है।
यह मामला खाद्य वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और डीलरों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम जनता की सुविधा के लिए एक मजबूत तथा भरोसेमंद राशन डीलर नेटवर्क की जरूरत है, जिसे सुनिश्चित करने में ऐसे वित्तीय विवाद बाधक बन सकते हैं।




