आरटीई प्रवेश में बाधा: पोर्टल ठप होने से सुनवाई अटकी, शिक्षा निदेशालय ने मोहलत बढ़ाई

भीलवाड़ा, राजस्थान। भीलवाड़ा जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की राह देख रहे हजारों अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर आई है। पिछले कुछ दिनों से आरटीई पोर्टल में तकनीकी खामी होने के कारण कई अभिभावक परेशान थे। इस तकनीकी बाधा के कारण सीबीईओ स्तर पर जनसुनवाई अटकी हुई थी, जिससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।
शिक्षा विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ने पोर्टल से जुड़ी खामियों एवं आवंटन प्रक्रिया में देरी के मद्देनजर प्रथम चरण के आवंटन से संबंधित परिवेदनाओं के निस्तारण की समय सीमा को 2 अप्रैल से बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दिया है। यह निर्णय अभिभावकों और संबंधित अधिकारियों के हित में लिया गया है ताकि प्रवेश प्रक्रिया बिना किसी अड़चन के पूरी हो सके।
आरटीई पोर्टल की इस विफलता से प्रभावित अभिभावकों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई थी कि तकनीकी खामी के कारण वे अपने बच्चों का प्रवेश सही समय पर सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की थी। शिक्षा निदेशालय की यह बढ़ी हुई समय सीमा अब उन्हें एक प्रकार की सांत्वना देगी और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद करेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खामियों के बावजूद प्रशासन की त्वरित कार्यवाही से ही आरटीई का उद्देश्य साकार हो पाएगा। निजी स्कूलों में बच्चों को बिना किसी आर्थिक भार के शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना इस योजना का मूल लक्ष्य है। इसलिए समय-समय पर पोर्टल के तकनीकी पक्षों को मजबूत करना आवश्यक है ताकि इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की बाधा भविष्य में न आए।
अभिभावक भी इस नए निर्णय से उत्साहित हैं और वे शासन-प्रशासन की इस पहल की सराहना कर रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी शिकायतों का सतत समाधान सुनिश्चित करें और आरटीई के सुचारू संचालन के लिए हर संभव कदम उठाएं।
इस प्रकार, भीलवाड़ा जिले में आरटीई प्रवेश की प्रक्रिया अब पुनः पटरी पर लौट रही है। अभिभावक अब आश्वस्त हैं कि उनके बच्चे योग्य स्कूलों में निशुल्क प्रवेश पा सकेंगे और उनकी शिक्षा संबन्धी परेशानियों में जल्द ही सुधार होगा।




