बूँदी

बुंडी : गेहूं, चना, कलौंजी और सब्जी की फसलें बर्बाद, मुआवजे की मांग तेज

नैनवां, बुंडी, राजस्थान – सोमवार शाम को नैनवां क्षेत्र में अचानक ओलावृष्टि ने उपखण्ड के एक दर्जन गांवों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। करीब बीस मिनट तक चले ओलों और तेज बारिश ने गेहूं, चना, कलौंजी और सब्जी की फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है, जबकि सरसों की फसल भी कटकर खराब हो गई है।

स्थानीय किसानों के अनुसार नींबू के आकार के ओलों की मार से खेतों में उपजाई गई फसलें बर्बाद हो गई हैं। चेनपुरिया, बिजलबा, हनुवंतपुरा, सुवानिया, धानुगांव, पांडुला, खोलाडा, धीरपुर, पीपरवाला, सुन्थली और धानुगांव सहित आसपास के क्षेत्रों में ओलों ने मानों कहर ढा दिया। कई खेतों में ओलों की परत आधा फीट तक जमा रही, जो अगले दिन तक भी पिघल नहीं पाई।

ओलावृष्टि जितनी प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आई, उतनी ही किसानों के लिए एक बड़ी समस्या भी बन गई है। नुकसान की भरपाई को लेकर किसानों ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है। खेतों की हालत देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस बार फसल न्यूनतम आय भी प्रदान करने में असमर्थ रहेगी, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाएंगी।

किसान नेता दिगंबर सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र के किसान लंबे समय से कम बारिश और महामारी जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, ऐसे में यह ओलावृष्टि उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने वाला साबित हुई। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द सहायता राशि का इंतजाम करने की अपील की है।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि नुकसान का आकलन के लिए त्वरित टीमों का गठन कर दिया गया है। जल्द ही फसलों को हुए आर्थिक क्षति का मूल्यांकन करके सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद ही मुआवजे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से धैर्य रखने की अपील की है और आश्वासन दिया कि हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

यहां यह भी बताना आवश्यक है कि ओलावृष्टि के कारण कृषि उत्पादन में गिरावट आने से स्थानीय बाजारों में सब्जी और अनाज की कीमतें भी बढ़ने की संभावना है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी प्रभावित होना पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन के दौर में तैयारी और सतर्कता बढ़ाना जरूरी है। किसानों को मौसम की सूचनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि वे समय रहते संक्रमण और वित्तीय नुकसान से बच सकें। साथ ही, सरकार को भी ऐसी आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए प्रभावी सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन करना चाहिए।

नैनवां उपखंड की यह ओलावृष्टि इस बार का सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा रही है, जिसने किसानों की मेहनत और भविष्य दोनों पर गहरा असर डाला है। उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार जल्द स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया तेज करेंगे ताकि किसान अपनी खेती-किसानी फिर से शुरू कर सकें।

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