मंडी में फसल लाने से बच रहे किसान, बाजार भाव बढ़ने की उम्मीद

हनुमानगढ़, राजस्थान
हनुमानगढ़ जिले की टाउन व जंक्शन मंडी में सरसों और चने की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हो पाई है, जिससे किसानों में बेचने की इच्छा कम होती जा रही है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, किसान मंडी में फसल लाने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि बाजार भाव में वृद्धि होने पर उन्हें बेहतर कीमत मिल सकेगी।
हालांकि, बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी फसल बेचने के लिए पहले ही पंजीकरण करवा लिया है, लेकिन खरीद केंद्रों पर उनकी उपस्थिति नगण्य बनी हुई है। इस स्थिति का मुख्य कारण खरीद की तारीख मिलने के बाद भी किसानों को आशंका है कि वे तुंरत लाभकारी दाम नहीं पा सकेंगे और बेहतर मौका मिलने तक वे अपनी फसल मंडी में लाने से कतरा रहे हैं।
हनुमानगढ़ टाउन मंडी में सरसों और चने की खरीद के लिए संख्या में गिरावट आई है, जबकि खरीद की तारीखों की घोषणा लगातार हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में किसानों की आर्थिक स्थिति इस तरह की राजनीतिक व कारोबारी गतिविधियों से प्रभावित हो रही है, जिसके कारण वे जोखिम नहीं लेना चाहते।
सरकार ने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद प्रक्रिया शुरू की है तथा किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन बाजार की अनिश्चितता ने किसानों की उत्सुकता घटाई है। इस कारण मंडी में खरीदी का स्तर कम होने से ना केवल किसानों को नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय कृषि बाजार की परिस्थितियां भी प्रभावित हो रही हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसानों को वर्तमान स्थिति के मद्देनजर तुरंत फसल बेचने की सोच रखनी चाहिए क्योंकि संकट के बीच मोबाइल मंडी और सरकारी खरीद केंद्र उनका भरोसेमंद विकल्प बने हुए हैं। यदि किसान अधिक समय तक फसल अपने पास रखेंगे तो उसे खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे नुकसान संभव है।
हनुमानगढ़ प्रशासन ने कहा है कि वे खरीद प्रक्रिया को सुचारु करने और किसानों को बेहतर सूचना प्रदान करने के लिए कार्य कर रहे हैं। जल्द ही किसानों के लिए जागरूकता अभियान शुरू किए जाएंगे, जिससे वे अपनी फसल सही समय पर मंडी में लेकर आएं और उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।
इस बीच, फसल की बारिश और मौसम की अनिश्चितता भी किसानों के फैसलों को प्रभावित कर रही है। अपेक्षा है कि आगामी सप्ताहों में बाजार भाव में सुधार होगा और खरीद केंद्रों पर किसानों की संख्या बढ़ेगी, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनेगा।




