धौलपुर

ट्रेक से दूर रहेगी निराश्रित गोवंश, सुरक्षित होगा यात्रा

पलवल, हरियाणा। धौलपुर से पलवल तक रेलवे लाइन पर सुरक्षा के लिहाज से नए कदम उठाए जा रहे हैं। रेलवे विभाग द्वारा इस मार्ग पर बेरीकेड्स लगाकर यात्रियों और ट्रैक से गुजरने वाले पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम खास तौर पर निराश्रित गोवंश और अन्य पशुओं की सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो रेलवे ट्रैक पार करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं।

पलवल जिले में सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि धौलपुर से पलवल के बीच रेलवे ट्रैक के किनारे बेरीकेड्स लगाए जाएंगे। इस कार्य के तहत रेलवे ट्रैक को ऐसे प्राचीरों से घेरा जाएगा, जिससे चाहे कोई जानवर हो या व्यक्ति, ट्रैक पर अनावश्यक रूप से न आएं और दुर्घटना की संभावना कम हो। सुरक्षा के इस कड़े इंतजाम से रेलवे दुर्घटनाएं कम होने की उम्मीद है।

स्थानीय अधिकारी बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ट्रैक पर गऊवंश और अन्य पशुओं से हुई कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे यात्रियों तथा पशुओं दोनों को भारी नुकसान पहुंचा है। इन बेरीकेड्स से न केवल पशुओं की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि यात्रियों का सफर भी बेहतर होगा। इसके अलावा, यह कदम रेलवे ट्रैक के आसपास के जंगल और गांवों के लोगों के बीच सुरक्षा भावना को भी मजबूत करेगा।

रेलवे विभाग के जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना का कार्य शीघ्र ही शुरू होगा और दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। बेरीकेड्स के निर्माण से ट्रेन की गति और संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी बल्कि दुर्घटना नियंत्रण के कारण ट्रेन सेवा और भी सुरक्षित एवं विश्वसनीय होगी।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे अपनी एवं अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम माना है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे अब वे बिना डर के रेलवे ट्रैक के आसपास अपनी दिनचर्या निभा पाएंगे और अपने पशुओं को जोखिम में डाले बिना चराई के लिए सुरक्षित क्षेत्र दे पाएंगे।

इस नया सुरक्षा इंतजाम पलवल और धौलपुर के बीच आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी राहत का संदेश लेकर आया है। यात्री अब सुरक्षित और निश्चिंत होकर अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे। रेलवे प्रशासन ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर काम करने की भी बात कही है, ताकि बेरीकेड्स के रखरखाव और निगरानी में कोई कमी न रहे।

यह प्रयास रेलवे ट्रैक सुरक्षा और स्थानीय पशु जीवन के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भविष्य में इस तरह की परियोजनाओं को अन्य संवेदनशील इलाकों में भी लागू करने की संभावना है, जिससे पूरे रेलवे नेटवर्क को सुरक्षित बनाया जा सके।

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