जैनाचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर ने कहा- संयम और जागरूकता से बनता है आत्म कल्याण का मार्ग

इन्दौर, मध्यप्रदेश
भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर जैनाचार्य जिन मनोज्ञसूरीश्वर महाराज ने उनके जीवन, उपदेशों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विशेष विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जैन धर्म के अनुसार प्रत्येक युग में 24 तीर्थंकर लोक कल्याण के लिए अवतरित होते हैं जिनमें से वर्तमान अवसर्पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे, जबकि आज समस्त जैन समाज महावीर स्वामी के धर्म शासनकाल में जीवन यापन कर रहा है।
जैनाचार्य ने अपने व्याख्यान में कहा, “भगवान महावीर के उपदेश केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी मार्गदर्शन प्रस्तुत करते हैं। विशेष रूप से अहिंसा का सिद्धांत आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है। इसके माध्यम से ही समाज में स्थिरता, शांति एवं भाईचारे की स्थापना संभव है।”
उन्होंने बताया कि महावीर स्वामी का जीवन संयम, तपस्या, सत्य और करुणा का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे अपनाकर व्यक्ति न केवल आत्म कल्याण बल्कि सामाजिक कल्याण का भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उनके उपदेशों में जीवन के प्रत्येक पहलू के लिए मूल्यवान सीख है जो आज भी जीवंत और व्यवहारिक हैं।
विशेष रूप से संयम और जागरूकता पर बल देते हुए जैनाचार्य ने कहा कि आधुनिक दौर में आत्मा की शुद्धि एवं मानसिक स्थिरता के लिए संयम जरूरी है, जबकि जागरूकता से व्यक्ति अपने कर्तव्यों और दायित्वों को समझ पाता है। ये दोनों तत्व मिलकर जीव को मोक्ष की ओर अग्रसर करते हैं।
“आज समाज में जहां हिंसा, द्वेष एवं अन्याय के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वहां महावीर स्वामी के संदेश एक नई दिशा और आशा का संचार करते हैं,” उन्होंने कहा। जैनाचार्य ने सभी धर्मों के अनुयायियों से इस सरल लेकिन सशक्त सिद्धांत के प्रचार एवं पालन का आह्वान भी किया।
इस अवसर पर अनेक नागरिक, जैन समाज के गणमान्य सदस्य एवं युवा वर्ग ने भाग लिया और कार्यक्रम स्थल पर भगवान महावीर के प्रति आस्था एवं श्रद्धा प्रकट की। महोत्सव के अंत में जैनाचार्य ने सभी को संयुक्त रूप से अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
इस प्रकार भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव के माध्यम से न केवल उनकी शिक्षाओं का स्मरण हुआ, बल्कि वर्तमान समय में उनके आदर्शों को अपनाने की भी प्रेरणा मिली। संयम और जागरूकता को आत्मसात कर व्यक्ति एक बेहतर समाज और शांति पूर्ण जीवन की ओर बढ़ सकता है।




