बांसवाड़ा

प्रवेशोत्सव ऐप : राजस्थान के शिक्षा विभाग का बड़ा आदेश, सरकारी स्कूल के शिक्षकों को मिला नया काम

जयपुर, राजस्थान

राजस्थान में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य शिक्षा विभाग ने एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने प्रवेशोत्सव सघन अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है, जो 25 मार्च से आरंभ होगा। इस अभियान के तहत शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे और प्रत्येक परिवार की जानकारी डिजिटल रूप से ‘प्रवेशोत्सव एप’ में दर्ज करेंगे। इससे स्कूल से वंचित बच्चों की सटीक पहचान कर उन्हें तुरंत शिक्षा से जोड़ा जा सकेगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस पहल से राज्य के दूर-दराज इलाकों में भी ऐसे बच्चों को पढ़ाई के योग्य बनाया जाएगा, जो अभी तक किसी कारणवश स्कूल में नहीं जा पाए हैं। प्रवेशोत्सव एप का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से डाटा संग्रहण को बढ़ावा देना और समय-समय पर बच्चों की उपस्थिति पर नजर रखना है। इस एप के माध्यम से बच्चों की संख्या, परिवार की जानकारी और उनकी शैक्षणिक स्थिति का रियल-टाइम डेटा संकलित होगा।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा शिक्षित हो और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके। प्रवेशोत्सव अभियान और इस एप के माध्यम से यह संभव होगा कि कोई भी बच्चा बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।” उन्होंने शिक्षकों को इस कार्य में पूरी निष्ठा और समर्पण से काम करने के लिए भी कहा।

शिक्षक इस अभियान के द्वारा न केवल बच्चों की सीखने की स्थिति का आकलन करेंगे, बल्कि अवसर-समस्याओं को भी पहचान कर सुधार के उपाय सुझाएंगे। इस अभियान में शिक्षा विभाग ने प्राथमिकता दी है कि सर्वे में जो बच्चे स्कूल से वंचित पाए जाएंगे, उन्हें शीघ्र ही सरकारी सहायता तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंचाया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग इस तरह के सामाजिक अभियानों में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाता है, जिससे नीतियां प्रभावी होती हैं। प्रवेशोत्सव एप के माध्यम से जमा किए गए डेटा का विश्लेषण कर भविष्य की योजनाओं को अधिक वैज्ञानिक और कारगर बनाया जा सकेगा।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इस नए काम के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे एप के तकनीकी पहलुओं को समझ सकें और पूरी ईमानदारी से अपना दायित्व निभा सकें। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर स्थानीय पंचायत तक सभी स्तरों पर सहयोग मांगा गया है।

राजस्थान सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में राज्य के शैक्षिक मानक में उल्लेखनीय सुधार होगा और हर बच्चा शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बन पाएगा। प्रवेशोत्सव अभियान राजस्थान के शैक्षिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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