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मिड डे मील की आंच में तपतीं महिलाएं: दिहाड़ी मनरेगा से भी कम, सिर्फ 82 रुपए में परिवार कैसे चलेगा

Input: महंगाई के इस दौर में जहां एक तरफ सरकारें महिला सशक्तीकरण और न्यूनतम मजदूरी के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं राजस्थान के सरकारी स्कूलों में लाखों बच्चों का पेट भरने वाली 1 लाख 16 हजार से अधिक ‘कुक कम हेल्पर्स’ (रसोइया) आर्थिक तंगी की आंच में झुलस रही हैं। राज्य सरकार ने मिड-डे मील पकाने वाली इन महिलाओं के मानदेय में 10 प्रतिशत की जो तथाकथित वृद्धि की है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद भी भीषण गर्मी में घंटों चूल्हा फूंकने वाली इन महिलाओं को मात्र 82.23 प्रतिदिन मिलेंगे, जो एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम दिहाड़ी के चौथाई हिस्से के बराबर भी नहीं है। [/gआधार पर एक पूरी तरह से मानव द्वारा लिखी गई जैसी प्रोफेशनल न्यूज़ रिपोर्ट तैयार करें। निर्देश:
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