चित्तौड़गढ़: खेतों में पीली सुनहरी चमक, सरसों-गेहूं से आगे निकली सूरजमुखी, बदल रही किसानों की किस्मत

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पारंपरिक खेती के तरीकों में अब बदलाव नजर आ रहा है। यहां के किसानों ने कम पानी और कम लागत में अधिक लाभ के लिए सूरजमुखी की खेती अपनानी शुरू कर दी है, जो उनके लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।
बड़ी सादड़ी उपखंड के ओरवड़िया गांव में चलाया जा रहा यह प्रयोग कट्स मानव विकास केंद्र और हैदराबाद के तिलहन संस्थान के सहयोग से सफल हो रहा है। इस पहल ने न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ाई है बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है। जिले के 39 अन्य खेतों में भी इस तरीके को अपनाकर किसान बेहतर लाभ कमा रहे हैं।
सूरजमुखी की फसल के बारे में किसानों का कहना है कि इसे उगाना सरल है और इसकी देखभाल में कम पानी लगता है। खासकर राजस्थान जैसे जल-संकट वाले क्षेत्र में सूरजमुखी खेती किसानहितकारी साबित हो रही है। पारंपरिक फसलों जैसे सरसों और गेहूं की जगह सूरजमुखी ने अपनी खास पहचान बना ली है।
प्रत्येक किसान की कहानी में यह दिखता है कि कैसे सूरजमुखी की फसल ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। नजदीक के प्रतापगढ़ जिले में भी सूरजमुखी की खेती तेजी से बढ़ रही है, जहां किसानों का कहना है कि यह फसल कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सूरजमुखी की खेती से भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है, जिससे दीर्घकालिक लाभ संभव है। साथ ही बाजार में इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है।
सरकार और विभिन्न कृषि संस्थान भी इस नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस पहल का लाभ उठा सकें। इस तरह की सफल पहल राजस्थान में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में सहायक साबित हो रही है।
इस पहल से न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि हो रही है, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास हो रहा है। सूरजमुखी की इस सफलता को देखकर अन्य जिले भी इस मॉडल को अपनाने की योजना बना रहे हैं।




