डूंगरपुर जल संकट : सूखे जलस्रोतों के कारण वन्य जीवों का गांवों की ओर रुख, ग्रामीणों में चिंता

डूंगरपुर, 24 अप्रैल: डूंगरपुर जिले के गढ़ी रेज क्षेत्र के डडूका माकोडतोल वन क्षेत्र में जलस्रोतों के सूखने की समस्या ने वन्यजीवों के जीवन पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। इस क्षेत्र के जो पेयजल स्रोत प्राचीन काल से वन्य जीवन का मुख्य आधार रहे हैं, वे अब लगभग शुष्क होते जा रहे हैं। इस कारण वन्य जीव पानी की तलाश में गांवों की ओर बढ़ने लगे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है।
वन क्षेत्र के कई छोटे व बड़े तालाब और कुंए जो जल भंडार का काम करते थे, वे वर्षा के अभाव और प्राकृतिक गतिशीलता के कारण सूख गए हैं। वन्यजीव जैसे कि नीलगाय, सियार, हिरण और बंदर पानी के लिए अब मानव आवास के करीब आ रहे हैं, जिससे अक्सर इनके और स्थानीय ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
स्थानीय वन अधिकारीयों के अनुसार, गढ़ी रेज का यह वन क्षेत्र जलस्रोतों के सूखने से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि जलस्रोतों की पुनर्स्थापना के लिए उचित योजना बनाकर जल्द कार्रवाई आवश्यक है। प्रभावी जल संरक्षण उपाय न अपनाए जाने पर इस संकट का दायरा और बढ़ सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हाल के कुछ महीनों से पानी की कमी के कारण वन्य जीव उनके खेतों और बस्तियों तक आने लगे हैं। इससे फसलें नुकसान पहुंच रही हैं और बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या को प्राथमिकता पर लेकर शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है।
वहीं, वन विभाग ने जंगलों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पोखर, तालाबों की खुदाई और नव निर्माण पर जोर दिया है। साथ ही पानी बचाने और वर्षा जल संचयन की योजनाओं को तेज करने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जल संकट से निपटने के लिए प्राकृतिक जल संधारण तंत्र को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
डूंगरपुर जिले में जल संकट पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। जल स्रोतों के स्थायी संरक्षण, वन्य जीव सुरक्षा व ग्रामीण सुरक्षा के बेहतर प्रबंधन के लिए सभी पक्षों के समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।




